उरई । राष्ट्रीय पर्वों को बोझ समझने की मानसिकता के कारण झंडरोहण में हड़बड़ी बरती जाती है जो शर्मनाक चूक की वजह बन जाती है । ब्लाक महेवा के जरारा गाँव में सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक की ऐसे ही  लापरवाही से गांधी जयंती के दिन फिर देश को नीचा देखना पढ़ा ।

सोमवार को जरारा में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार ने इस तरह से झंडा फहराया कि उनके पीठ फेरते ही वह नीचे गिर पड़ा । झंडे की इस तौहीन पर पूरे दिन किसी का ध्यान नहीं गया । इन्तहा तो यह हुई कि शाम को झंडा उतार लिया जाता है लेकिन रात तक इसके लिए कोई नहीं आया । किसी जागरूक ग्रामीण ने झंडे की अवमानना की तस्वीर मोबायल के कैमरे में कैद कर ली । तस्वीर में विद्यालय की छत पर ग्राम प्रधान की कटी हुई तिल की फसल  के  ढेर भी दिखाई दे रहे हैं जिसकी इजाजत नहीं होनी चाहिये ।

जिन शिक्षकों पर नौनिहालों में बचपने से ही राष्ट्रीय भावनाएँ मजबूत करने की जिम्मेदारी है जब वे खुद ही राष्ट्रीय सम्मान के लिए गंभीर नहीं रहते तो आने वाली पीढ़ी कैसे देश के गौरव के लिए संजीदा हो पाएगा , यह सवाल जो ऐसी चूक के समय फनफनाते हुए सामने खड़े हो जाते हैं ।

 

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