निकाय चुनाव: सियासी परिदृश्य

कोंच-उरई । निकाय चुनाव में कोंच नगर पालिका सीट अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित हो जाने के बाद प्रत्याशियों को लेकर जो नई चुनावी तस्वीर बनी है उसने प्रत्याशियों की धड़कनें बढा दी हैं। खासतौर पर दलीय प्रत्याशी जो खुद को चुनावी समर का मुख्य योद्घा मान कर चल रहे थे उनकी पेशानी पर निर्दलीयों ने बल डाल दिये हैं। जातीय समीकरणों के लिहाज से भी अगर देखा जाये तो अंतर्जातीय शादियों ने आरक्षण का कबाड़ा किया है जिसके चलते काछी, मुस्लिम और वैश्य प्रत्याशी सियासी लिहाज से काफी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। कुल मिला कर उलझे जातीय समीकरणों में चुनावी रुझान भी उलझ कर रह गये हैं।
कोंच पालिका के डेढ सौ सालों के इतिहास में यह पहला मौका है जब प्रत्याशियों और मतदाताओं को नये अनुभवों से दो चार होना पड़ रहा है। कहने को तो कोंच पालिकाध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित है लेकिन वैश्य, काछी और मुस्लिम भी चुनावी रिंग में बतौर खिलाड़ी जमे हैं जिसके चलते जातीय समीकरण पूरी तरह उलझ कर रह गये हैं। अध्यक्ष पद के मौजूदा सत्रह प्रत्याशियों में कोरी, चर्मकार, बाल्मीकि, धोबी तो आरक्षण के चलते हैं ही, कोरी विरादरी की तीन महिलाओं से अंतर्जातीय शादियां करने के कारण वैश्य, काछी और मुस्लिम ने भी अपनी प्रत्याशिता ठोंक कर आरक्षण व्यवस्था में छेद ढूंढ कर मुकाबला काफी दिलचस्प बना दिया है। सारी जातियां अपनी जाति विरादरी के प्रत्याशी के पीछे लामबंद नजर आने लगी हैं। यह स्थिति अपने को फाइट में मान रहे प्रत्याशियों के लिये परेशानी का सबब बनी है। निर्दलीयों की लंबी कतार भी दलीय प्रत्याशियों के माथे पर बल डालने बाली है। यहां बेहद दिलचस्प यह है कि अनुसूचित विरादरी के वोट बड़ी संख्या में बट रहा है जबकि गैर अनुसूचित वोट की लामबंदी ने नये जातीय समीकरण पैदा किये हैं। ऐसे में देखना बाकई दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।
पहले लगाते हैं झाड़ू फिर मांगते हैं वोट

कोंच पालिकाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे आप प्रत्याशी गौरीशंकर वर्मा आजकल कोंच की जनता के केन्द्र विंदु बने हुये हैं। वे अपना चुनाव निशान झाड़ू अपनी बगल में दबा कर चलते हैं और कस्बे का पैदन राउंड लगाते हैं। जिस घर या दुकान में ये वोट मांगने जाते हैं वहां पहले वह झाड़ू लगा कर साफ सफाई करते हैं इसके बाद अपने लिये वोट मांगते हैं। गौरीशंकर के बारे में यहां की जनता यह भी जानती है कि इन्हें चुनाव लडऩे का भारी शौक है जिसके चलते यह कई विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।







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