उरई । उरई नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के 29 उम्मीदवारों में मुख्य मुकाबले में मात्र आधा दर्जन प्रत्याशी हैं । अन्य प्रत्याशियों की अहमियत वोट कटवा के अलावा कुछ नहीं है ।

चुनाव मैदान में ललकार रहे निर्दलीय उम्मीदवारों में से कुछ तो महारथियों के बीच मुकाबले की दिशा बदलने के लिए लाये गए शिखण्डी हैं तो कुछ नाम चमकाने की भूख की वजह से चुनाव में कूद पड़े हैं ।

विचारक और लेखक देवेन्द्र शुक्ला का कहना है कि अतीत में पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय चौधरी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बहुत ज्यादा वोट बटोर कर सभी को चौंका दिया था हालांकि इसके वाबजूद बाजी उनके हाथ से खिसक गई थी । बाद में उनकी माँ गिरजा चौधरी को निर्दलीय होते हुए भी कामयाबी मिल गई थी । निर्दलीय उम्मीदवार उन्ही से प्रेरित हो रहे हैं । इस बार अनिल बहुगुणा भी निर्दलीय हैसियत में चुनावी मुकाबले में चौकाने वाला प्रदर्शन कर रहे हैं फिर नतीजा चाहे जो हो ।

जाने माने विद्वान विनोद गौतम कहते हैं कि ज्यादातर निर्दलीय प्रत्याशियों की जमानत जब्त होना तय है । फिर भी उनका उत्साह आश्चर्यजनक है । वे धूम धड़ाके भरे अपने प्रचार में रुपये बहाने में कसर नहीं छोड़ रहे ।

वोट कटवा उम्मीदवारों से मुख्य मुकाबले में शामिल वे उम्मीदवार सबसे ज्यादा परेशान हैं जिनकी जातिगत या धार्मिक गोलबंदी में सेंध लग रही है ।

जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है वैसे वैसे इनको मनाने के प्रयास चुनावी कवायद की प्राथमिकता बनते जा रहे हैं । हालांकि चुनावी तस्वीर होने के साथ इनका साथ दे रहे मतदाताओं का मन पलटा जा रहा है । बक़ौल दैनिक अग्निचरण के प्रधान संपादक संजय दुबे , क्योंकि यह आम धारणा रहती है कि वोट जीतने की संभावना वाले उम्मीदवार के बजाय किसी को दे कर बर्बाद नहीं करना चाहिये ।

 

 

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