
उरई । गांधी जी ने अनशन के हथियार से ब्रिटिश हुकूमत को भारत से वापस जाने को विवश कर दिया था, मगर आज अधिकांश अनशन व्यक्तिगत स्वार्थों की खातिर ही किये जाते हैं।
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह कैसरबाग लखनऊ में शुक्रवार को कानपुर के रंगकर्मियों द्वारा मंचित नाटक दस दिन का अनशन में यह बात प्रभावशाली ढंग से रेखांकित की गयी।
प्रसिद्ध लेखक हरिशंकर परसाई की इस कहानी का नाट्य रूपांतरण संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के उप सचिव सुमन कुमार व निर्देशन डा. ओमेन्द्र कुमार ने किया।
नाटक के मंचन से पहले कला संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए डा. अनिल रस्तोगी व डा. अनीता सहगल को लाइफ टाइम एचीवमेंट एवार्ड से सम्मानित भी किया गया।

नाटक देश में तेजी से पनप रहे कथित बाबाओं पर तीखा व्यंग्य है। नाटक में एक नौजवान बन्नू को अपने मौहल्ले की सन्नो भौजी (भाभी) से प्यार हो जाता है। शादीशुदा सन्नो बन्नू को घास भी नहीं डालती और तो और सन्नो का पति धर्मेन्द्र एक बार बन्नो की पिटाई भी कर चुका है। मौहल्ले के मनचले संतो बंतो बन्नो को बाबा सनकीदास के पास ले जाते हैं जो आमरण अनशन ट्रेनिंग इंटरनेशनल चलाते हैं। बाबा बन्नू को आमरण अनशन पर बैठा देते हैं और इस मामले को धार्मिक व राजनीतिक इश्यू बना डालते हैं।
बन्नू ऋषि वनमानुष और सन्नो को देवी को देवी घोषित कर दिया जाता है। अनशन की आड़ में मामले को राजनीतिक रूप दे दिया जाता है। आखिरकार अनशन के 10 वें दिन सन्नो की ऋषि वनमानुष संग विवाह की बात तय होती है। सन्नो अनशन स्थल पर पहुंचती है मगर विवाह के पहले ही भूख से व्याकुल बन्नो दम तोड़ देता है। कवि दुषयंत कुमार के गीत … हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए … फिर कोई गंगा हिमालय से निकलनी चाहिए … के साथ नाटक का पटाक्षेप होता है।
संगीत में उत्तर प्रदेश की लोक नाट्य शैली नौटंकी के परंपरागत वाद्ध यंत्र नक्कारे, नाल व हारमोनियम का इस्तेमाल कर निर्देशक डा. ओमेन्द्र कुमार ने नाटक को गति प्रदान की।
प्रमुख भूमिकाओं में सिरीष बहादुर सिन्हा, राघुवेन्द्र प्रजापति, स्वयं कुमार, सुरेश श्रीवास्तव, अनिल गौड़, जौली घोष, अनिल निगम, दीपिका सिंह, विजय भास्कर का अभिनय सराहनीय रहा। सम्राट यादव, सुमित गुप्ता, आशुतोष शुक्ला, धीरेन्द्र, अनामिका जायसवाल, शुभि मेहरोत्रा, महेश, अभिषेक भट्ट, कमल ने भी विभिन्न किरदार निभाये। राजीव तिवारी व अमरदीप कटियार ने बैक स्टेज में सहयोग दिया।
मंचन में अजय द्विवेदी (ड्रीम्स) व मुकेश वर्मा (सत्यपथ) लखनऊ का स्थानीय सहयोग रहा।
इस मौके पर डा. संतोष आशीष सहा. निदेशक गीत व नाटक प्रभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार लखनऊ, देवराज अरोड़ा, राजीव मित्तल सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।







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