उरई। मनमानी और लापरवाही को संरक्षण देना अधिकारियों के लिए अब आसान नही रह जायेगा। प्रदेश की योगी सरकार नये वर्ष की सौगात के रूप में 1076 हेल्प लाइन शुरू करने जा रही है। जिसमें शिकायतों के निस्तारण का फुलप्रूफ इंतजाम कर दिया गया है। फिर भी कोई अधिकारी हीलाहवाली करता है तो उसे दंड भोगना पड़ेगा।
सरकार के संवेदनशील चेहरे को प्रोजेक्ट करने के लिए 1076 हेल्प लाइन की योजना तैयार की गई है। मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि इस योजना में अधिकारियों को शिकायतों के निस्तारण के लिए इस कदर बांध दिया गया है कि टालमटोल की कोई गुंजाइश बचने वाली नही है। योजना की दृष्टि से प्रशासन के चार स्तर तय किये गये हैं। एल-1 में जिले के सभी विभागाध्यक्ष शामिल होगें। उन्हें एक सप्ताह में प्राप्त होने वाली शिकायत के निस्तारण की मोहलत दी जायेगी। एक सप्ताह से अधिक लंबित शिकायतों की मानीटरिंग जिला ओर मंडल स्तरीय अधिकारी करेगें जिन्हें एल-2 में शामिल किया गया है। इनको लंबित शिकायतों का 15 दिन के अंदर अंतिम तौर पर निस्तारण कराने का अवसर दिया जायेगा। एल-3 में शासन स्तर पर प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी रहेगें। ये अधिकारी निर्धारित अवधि में शिकायतें निस्तारित न होने पर विभागाध्यक्ष की जबावदेही तय कर उसके खिलाफ कदम उठायेगें। एल-4 में शासन के उच्चतम स्तर के अधिकारी होगें जो शिकायतों के शत-प्रतिशत निस्तारण को सुनिश्चित करायेगें।
गौरतलब है कि प्रत्येक मंगलवार को तहसील स्तर पर आयोजित होने वाले तहसील दिवस को वर्तमान शासन ने संपूर्ण समाधान दिवस का नाम दिया था। तांकि इस दौरान प्राप्त होने वाली शिकायतों के तार्किक निपटान के लिए प्रशासन के पेंच कसे जा सकें। लेकिन जिलों से जो फीडबैक आ रहा है उससे पता चलता है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नही समझ रहे और शिकायतों के सार्थक निस्तारण की बजाय लीपापोती करने वाली रिपोर्ट देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। इसी के बाद शासन ने उक्त हेल्पलाइन योजना को प्रस्तावित किया है। यह योजना वास्तविक तौर पर पीड़ितों के लिए कारगर मलहम बनेगी या योजना के नाम पर पीड़ितों को आगे भी कोरे दिलासे से काम चलाना पड़ेगा यह स्थिति जनवरी में योजना के लागू होने के बाद आने वाले परिणामों से साफ होगी।







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