उरई। पुलिस के तबादलों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता आमने-सामने आ गये हैं। आटा में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा लिखने की वजह से हटाये गये दरोगा की प्राइज पोस्टिंग को लेकर उन्होंने भाजपा अध्यक्ष पर सोशल मीडिया में खुला हमला बोल दिया। इसके साथ भारतीय जनता युवा मोर्चा की बैठक भी शुक्रवार को इस मुददे पर हुई जिसमें भाजपा अध्यक्ष के रवैये पर तीखा आक्रोश जताया गया।
जनपद में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में सत्तारूढ़ होने के बाद पहले ही दिन से ही अलग-अलग गुटों में बटी हुई है। लोक सभा चुनाव के पहले यह गुटीय द्वंद तीखा होने लगा है। जबकि पार्टी का उच्च नेतृत्व सभी जिलों में चुनावी एकजुटता के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।
माजरा यह है कि गत वर्ष आटा के तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील तिवारी की मौजूदगी में फोरलेन के वैरियर पर टोल वसूली को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामू निरंजन का झगड़ा हो गया था। वैरियर के मैनेजर और स्टाफ ने इसमें रामू निरंजन और उनके साथियों पर हमला करने में भी चूंक नही की थी। वावजूद इसके पुलिस ने कोई हस्तक्षेप तत्काल नही किया। यही नही तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील तिवारी ने इसे लेकर रामू निरंजन के खिलाफ मुकदमा भी कायम कर लिया था।
बाद में जब हड़कंप मचा तो पुलिस बैक फुट पर आ गई। टोल स्टाफ पर भी मुकदमा लिखा गया। इस जुर्रत को लेकर सुनील तिवारी को थानाध्यक्षी से हाथ धोना पड़ा था। दो दिन पहले हुए फेरबदल में सुनील तिवारी की फिर लाटरी निकल आई। उन्हें भाजपा के जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल के अपने थाने यानि कुंठौंद की इंचार्जी मिल गई।
इस पोस्टिंग ने रामू निरंजन के जख्म कुरेंद दिये हैं। उन्होंने गुरुवार को बिना नाम लिए एक पोस्ट डालकर भाजपा के जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल पर पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न करने वाले सुनील तिवारी को थाना दिलाने का आरोप लगाया है। कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसके बाद उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील तिवारी की नियुक्ति पर उनके गुस्से में अपना सुर मे सुर मिला दिया। इससे पार्टी में विवाद गहरा गया है। आज भारतीय जनता युवा मोर्चा की बैठक थी। इसमें भी सुनील तिवारी को थाना मिलने पर कार्यकर्ताओं का लहजा तल्ख रहा।
उधर कुठौंद में सपा ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद हुई हर्ष फायरिंग के चलते पूर्व थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार को हटाने से भी पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग नाराज है। उसका कहना है कि पार्टी ने दो जगह अविश्वास प्रस्ताव पेश कराया था जिसमें कदौरा में पार्टी को सफलता नही मिल पाई। जबकि कुठौंद में सफलता मिली थी। लेकिन कुठौंद में ही पुलिस पर इसकी गाज गिरा दी गई। पार्टी के अंसतुष्ट कार्यकर्ताओं का मानना है कि हर्ष फायरिंग को तूल देकर पार्टी अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मारने का काम कर रही है। जिसका खामियाजा उसे लोक सभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है।
गौरतलब यह है कि जिले में शीर्ष स्तर पर पहले से ही पार्टी में खुला टकराव चल रहा है। हर मुददे पर सांसद और विधायक विपरीत ध्रुवों पर खड़े नजर आते हैं। ओरछा में विस्तारक सम्मेलन के समापन के लिए जाते समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्र नाथ पाण्डेय एक रात के लिए उरई में ही रुके थे। उनके सामने भी गुटबंदी का नजारा पेश आया था। लेकिन वे भी अभी तक इसे रोकने के लिए कोई हस्तक्षेप नही कर पाये हैं।







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