उरई । गतिशील चेतना और निरपेक्ष दृष्टिकोण ने राहुल साकृत्यायन को रूढ़िवाद के बंधन से मुक्त करके महा पंडित बनाया । वे जितने बौद्धिक थे उतने ही जुझारू कार्यकर्ता भी रहे । संसार के तमाम देशों के विद्वानों को उन्होने प्रभावित किया जबकि वे केवल पाँचवा दरजा पास थे । बौद्ध धर्म को भारत में पुनर्जीवित करने में उन्होने महान योगदान दिया । आज के युवाओं के लिए उन्हें जानना बहुत जरूरी है ताकि वे वैचारिक ठहराव और पुनरुथानवादी मानसिक दोषों से बच कर बदलते परिवेश के अनुरूप देश को  मजबूत बनाने की भूमिका अदा कर सकें ।

यह विचार  राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर सोमवार को बघौरा स्थित शहीद भगत सिंह पुस्तकालय में नौजवान सभा और स्त्री मुक्ति लीग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए । इनमें मुख्य रूप से दिनेश कुमार , यशवंत , लक्ष्मी , बृजेश , अंजलि , अनुष्का , शालिनी , सलौनी , विजय , रंजना , दीपिका , विकास , कशिश , मिनहा , सोहा , अदिति , सत्यम , शिवानी , शिवम , रिशू सिंह , हर्षित आदि शामिल थे ।

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