भिण्ड। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों ही जगह एक ही पार्टी भाजपा की सरकारें हैं। लेकिन दोनों की नीतियों और मानकों में काफी अंतर है। अगर मामला उत्तर प्रदेश का हो तो जिस पुलिस कर्मी या एसडीएम के खिलाफ खनन माफियाओं से सांठगांठ के हाईटैक साक्ष्य उपलब्ध हो रहे हों उसे अंगद की तरह अपने क्षेत्र में जमे रहने का अभय वरदान मिल सकता है। लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसी करतूत उजागर होने पर संबंधित को कड़ी प्रताड़ना झेलनी पड़ सकती है।
ऐसा ही एक मामला जिले में सामने आया जब एएसआई रामनिवास गुर्जर के बारे में सोशल मीडिया पर 10 हजार रुपये लेकर रेत से भरा ट्रक छोड़ने का वीडियो वायरल हो गया। जिसके बाद डीआईजी सुधीर ने न केवल उसे निलंबित कर दिया बल्कि 300 किलोमीटर दूर श्योपुर जिले में अटैच कर दिया। अब रामनिवास गुर्जर के पैरोकार दिल्ली तक इस बात की पैरवी कर रहे हैं कि उन्हें मध्य प्रदेश सरकार की छत्रछाया से मुक्ति प्रदान कर डेपुटेशन पर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के पास भेज दिया जाये तांकि उनका भी सौजन्य पड़ोसी जिले जालौन के बालू खनन में माफियाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने वाले लोक सेवकों की तरह हो सके। मध्य प्रदेश में योगी सरकार की इस लोकप्रियता की वजह से खलबली मची हुई है।

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