* सत्ता में होने के बाबजूद उनकी नहीं सुने जाने का दर्द छलक कर आया सामने

* मामला भाजपा की मतदाता पुनरीक्षण को लेकर आहूत बैठक का

कोंच-उरई । निकट भबिष्य में होने बाले लोक सभा चुनाव की तैयारियों में लगी भाजपा को उस वक्त करारा झटका लगा जब कल आहूत संगठन की बैठक में कार्यकर्ता फट पड़े और उन्होंने वहां मौजूद जनप्रतिनिधियों और आला संगठनकर्ताओं को दो टूक खरी खरी सुनाई और चुनाव को लेकर किसी भी तरह की जिम्मेदारी संभालने से साफ मना कर दिया। कार्यकर्ताओं का टेढा रुख देख कर संगठन के बड़े पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चेहरे देखने लायक थे। कार्यकर्ताओं ने अपनी भड़ास निकालते हुये कहा कि बड़े पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि सत्ता की मलाई चाट रहे हैं और कार्यकर्ता पिट रहा है लेकिन उसकी मदद के लिये कोई भी आगे नहीं आता है। ऐसी स्थिति में क्यों वह पार्टी के लिये काम करें।

मंगलवार को यहां के आलीशान एसी सुविधा से लैस आशीर्वाद गेस्ट हाउस में भाजपा नगर इकाई की बैठक आहूत की गई थी। बैठक का एजेंडा था मतदाता पुनरीक्षण कार्य में कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी फिक्स करना ताकि वे अपने अपने बूथों पर नये मतदाता बनवायें। पार्टी संस्थापकों के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ शुरू हुई बैठक में पार्टी जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल, सांसद भानुप्रताप वर्मा, विधायक मूलचंद्र निरंजन, जिपं अध्यक्ष प्रतिनिधि देवेन्द्रसिंह निरंजन, विधानसभा विस्तारक शैलेन्द्रसिंह, नगर अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता सहित सैकड़ों की संख्या में भाजपाई जुटे थे। जैसे ही मंच की ओर से चुनाव में जिम्मेदारी संभालने के लिये टिप्स देने की शुरुआत हुई, सामने बैठे कार्यकर्ता यकायक फट पड़े और मंच से प्रतिप्रश्न किया कि क्यों वे किसी तरह की जिम्मेदारी लें। कार्यकर्ताओं ने दो टूक कहा कि कार्यकर्ता फट्टा बिछाने और उठाने के लिये ही बने हैं क्या, जब उन पर कोई आपत्ति विपत्ति आती है तो क्या उनकी किसी ने मदद की। वे तो यह भी कह सकने की स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे सत्तादल के हैं। न पुलिस और न ही प्रशासन में उनकी कोई सुनता है और न ही पार्टी के नेता उनकी मदद करते हैं। जिनके पास पावर है वे मलाई छान रहे हैं तो चुनाव में भी वे ही वोट दिलवा लें। कुछ ने तो व्यंग्यात्मक लहजे में यहां तक कह डाला कि जिस प्रकार उन्होंने नगर पालिका चुनाव में काम किया था, बैसा ही लोस चुनाव में भी करेंगे। यह सुन कर आला संगठनकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के चेहरे देखने लायक हो गये। कल की बैठक का नजारा देखकर यह तो साफ है कि पार्टी के भीतर सब कुछ क्या बिल्कुल भी ठीक नहीं है और आने बाले लोक सभा चुनाव में शायद प्रत्याशी के सामने कार्यकर्ताओं का जबर्दस्त टोटा उभर कर सामने आये।

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