उरई। घरों से कूड़ा उठाने के लिए मई 2016 में आउट सोर्सिंग के तहत भर्ती किये गये नगर पालिका के ठेका कर्मचारियों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में अपने कथित शोषण के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी करके बबाल जमाया बाद में जिलाधिकारी कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा।
2016 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत 65 सफाई कर्मचारी घर-घर रिक्शे से पहुंचकर कूड़ा उठाने के लिए रखे गये थे। जो सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक काम करते थे। लेकिन अब इन कर्मचारियों को वार्ड सभासद एवं सफाई नायकों के अधीन कर दिया गया है। इनका कहना है कि पहले इनकी डयूटी 6 घंटे में निपट जाती थी वहीं अब 12 घंटे काम करना पड़ रहा है। जबकि मानदेय के नाम पर केवल 6600 रुपये प्रतिमाह मेहनताना मिल रहा है। उसमें भी सफाई नायक एक हजार रुपये महीने सुविधा शुल्क काट लेते हैं और न देने पर कार्य करने के बावजूद गैरहाजिरी दर्ज कर देते हैं।
सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि मेहनताना दो-दो महीने तक लेट कर दिया जाता है। हर साल नवीनीकरण के नाम पर ठेकेदार 10 से 15 हजार रुपये अलग वसूल कर लेता है। ईपीएफ के नाम पर भी वसूली की जाती है। रिक्शा गाड़ी खराब होने या अन्य टूट-फूट पर स्वयं के पैसों से मरम्मत करानी पड़ती है। ठेका सफाई कर्मचारियों को न तो वर्दी दी जाती है और न सफाई उपकरण। यहां तक कि कूड़ा उठाने के साथ-साथ गंदे-अंधे नालों की सफाई भी उनसे बिना सुरक्षा उपकरणों के कराई जाती है।
ठेका सफाई कर्मचारियों ने अपर जिलाधिकारी पीके सिंह को ज्ञापन सौंपकर इस तरह के उत्पीड़न और शोषण से मुक्ति दिलाने की मांग की।
प्रदर्शन में राहुल कुमार, प्रमोद, अरविंद, प्रद्युम्न, राजा, राजेश, राजकुमार, चंद्रशेखर, सुधीर कुमार, संतकुमार, आकाश, सोनू, संजय, शनि, धर्मेंद्र, विक्की आदि शामिल थे।





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