उरई। अन्ना प्रथा ने फसलों की बर्बादी के साथ-साथ किसानों को रतजगा के लिए मजबूर कर दिया है। जिससे वे कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
खेतों में फसल जैसे ही तैयार होने लगती है किसानों के दिल की धड़कने बढ़ जाती हैं। दर्जनों मवेशियों के झुंड अगर खेत में घुस गये तो घंटा भर नही लगता और लहलहाता खेत वीराने में बदल जाता है। ऐसे में किसानों के लिए घर परिवार छोड़कर पूरी रात पहरेदारी के लिए खेत पर गुजारना जरूरी हो गया।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार का कहना है कि सरकार किसानों की खुशहाली की बात करती है लेकिन हालत यह है कि रतजगे ने किसानों की जिंदगी नरक बना दी है जिससे छुटकारे का कोई ठोस प्रयास अभी तक नही किया गया है। उन्होंने कहा कि दिन में भी नींद की भरपाई करने का कोई मौका किसानों के लिए नही है। क्योंकि तमाम जरूरी काम करने के लिए दिन में भी उसे खटना पड़ता है। हफ्तों बिना सोए रहने की वजह से किसान बीमार हो रहे हैं, उनकी मनोदशा बिगड़ रही है। स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाने की वजह से किसानों के घर में कलह की समस्या बढ़ने लगी है।
आरी वाली फैन्सिग पर प्रतिबंध
उधर जिस गाय को मां कहकर किसान पूजते थे आज उससे फसल को बचाने के लिए आरी (ब्लेड) वाले तारों की फैन्सिग कराकर गायों को मौत के मुंह में धकेलने से उन्हें गुरेज नही रहा। कई गौवंश इसमें उलझकर न केवल लहूलुहान हो चुके हैं बल्कि उनकी निर्मम मौत तक हो चुकी है। इन घटनाओं को संज्ञान में लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने खेतों की फैन्सिग के लिए ब्लेड वाले तारों के इस्तेमाल और करंट प्रवाहित करने पर रोक लगा दी है। जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने इसके मददेनजर बाड़ के लिए आरी वाले तारों का इस्तेमाल करने वाले किसानों पर मुकदमा कायम करने के आदेश जारी कर दिये हैं। जिससे इस तरह की फैन्सिग में कमी आई है लेकिन यह सिलसिला अभी पूरी तरह बंद नही हुआ है।





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