उरई । कोई भी भूखा न सोये के उद्देश्य के साथ शुरू किया गया विश्व का पहला अनाज बैंक लगातार विस्तार प्राप्त कर रहा है ।  इसी कड़ी में शहर में बुन्देलखण्ड का पहला अनाज बैंक शुरू किया गया । इसका उद्देश्य भी बुन्देलखण्ड में भूख के खिलाफ मुहिम चलाना था ।  विगत एक वर्ष से यहां अनाज बैंक पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से काम कर रहा है ।  ऐसे में अब इसका विस्तार समूचे  बुन्देलखण्ड क्षेत्र में किये जाने का विचार किया गया है। यह जानकारी दिसम्बर माह के दूसरे वितरण के अवसर पर रविवार को  अनाज बैंक की निदेशक डॉ० अमिता सिंह ने दी । उन्होंने बताया कि जल्द ही सहयोगीजनों से विमर्श के बाद इस दिशा में कदम उठाया जायेगा । इससे समाज के अन्य लोगों का भी योगदान अनाज बैंक को मिल सकेगा ।

विशाल भारत संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि चूंकि वितरण के लिए किसी तरह का सरकारी सहयोग नहीं लिया जाता है। सम्पूर्ण वितरण नागरिकों के सहयोग से ही किया जाता है।  विगत कई माह से जनपद से तथा बुन्देलखण्ड के अलग-अलग क्षेत्रों से अनेक लोगों ने इस कार्य में सहयोग करने का आश्वासन दिया है। ऐसे लोगों की सहायता से अलग-अलग जगहों पर अनाज बैंक शाखा का विस्तार किया जायेगा,  जहाँ जरूरतमंद महिलाओं को अनाज प्रदान कर भूख के खिलाफ लड़ाई को और तेज किया जायेगा।

श्रीमती अनिला राणावत की स्मृति में संचालित अनाज बैंक में आज का वितरण उनकी पुत्री पौरवी सिंह राणावत द्वारा किया गया। पौरवी ने इस अवसर पर कहा कि समाज की इन महिलाओं का सहयोग करके उन्हें बहुत सुखद अनुभूति हो रही है। ऐसे कार्यों से समाज के परेशान, मजबूर लोगों से जुड़ने का अवसर मिलता है, साथ ही भावनात्मकता में वृद्धि करता है।

वितरण में मीना, चंदा, सुशीला, धनवंतरी, फातिमा, सावित्री देवी, बेटी बाई, नसरीन, रामकुंवर, सुमन देवी आदि लाभार्थी महिलाओं सहित सुभाष चंद्रा, धर्मेन्द्र कुमार, जीनत परवीन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे । जनवरी माह का पहला वितरण 6 तारीख को प्रातः दस बजे से किया जायेगा।

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