बांदा । चुनाव आयोग की नजरों में नंबर बढ़ाने के लिए हर चुनाव में डीएम अपने जिले में सबसे ज्यादा मतदान की होड़ में लग जाते हैं लेकिन बांदा के जिलाधिकारी हीरालाल ने इस मामले में ऐसा टारगेट साधने की घोषणा की है जिसकी बराबरी की कल्पना से ही दूसरे जिलाधिकारियों को पसीने छूट सकते हैं । उन्होने नाइंटी प्लस यानी 90 प्रतिशत से अधिक मतदान कराने का बीड़ा उठाया है । इसके लिए उन्होने अचूक रणनीति का तानाबाना बुना है जिसमें कई आकर्षक पहलू शामिल हैं । उनकी धुन इतनी पक्की है कि वे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में इसके कारण दर्ज दिखाई दें तो आश्चर्य न होगा ।

 

कैसे सूझा इतना कठिन संकल्प

डीएम हीरालाल बताते हैं कि बांदा जिले में विभिन्न चुनावों के वोटिंग ट्रेंड को उन्होने परखा । गत पंचायत चुनाव में कोलावल रायपुर पंचायत में 91.80 और नरैनी ब्लाक की शाहपाटन पंचायत में 90.70 प्रतिशत मतदान देख कर वे दंग रह गए जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में जनपद में केवल 59.26 और 2017 में  विधान सभा चुनाव में चारों सीटों पर औसतन 60 प्रतिशत मतदान हो पाया । उनके मन में संकल्प कौंधा कि अगर 2 पंचायतों में 90 प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़ सकते हैं तो हर पंचायत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता । इसी भरोसे उन्होने लोकसभा चुनाव के लिए 90 प्लस का मिशन छेड़ दिया ।

बूथ देवता

जिलाधिकारी हीरालाल के नुस्खे लाजवाब हैं । मतदान प्रतिशत बढ़ाने में बी एल ओ सबसे शानदार योगदान कर सकता है । इसके मद्देनजर उन्होने हर बी एल ओ को बूथ देवता के नाम से नवाज़ कर जो गौरव दिया उसका नतीजा है कि वे एक -एक मतदाता को प्रेरित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे । साथ ही हर अधिकारी और महत्वपूर्ण कर्मचारी के जिम्मे एक -एक बूथ का जिम्मा सौंप दिया है ।

डीएम का संप्रेषण हुनर

जिलाधिकारी हीरालाल के दिमाग में अनोखे तरीकों का खजाना है और संप्रेषण करने का हुनर इतना पावरफुल है कि वे लोगों पर सम्मोहन जैसा असर डाल कर उन्हे मोटीवेट करने में कोई सानी नहीं रखते । उन्होने ए डी आर को अपना नालेज पार्टनर बनाया है । ए डी आर के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा भी इतिहास रचने के लिए बांदा में ही मुकाम करके उनके कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं । उन्होने बताया कि जिलाधिकारी हीरालाल जब  मतदाताओं के बीच संबोधित करते हैं तो लोगों पर जादुई असर होता है ।

छा गए 90 प्रतिशत के बैनर

बांदा में जगह -जगह बैनर लगे हैं जिन पर लिखा है 90 प्रतिशत हो मतदान , बांदा बने देश की शान । ये बैनर जिले भर में छा गए हैं । इसके अलावा यही स्लोगन लिखे लीफलेट हजारों की संख्या में वितरित करा दिये गए हैं । मतदान प्रेरक की सफ़ेद टोपी और ड्रेस भी निर्धारित की गई है । खुद डीएम भी इस बाने में रहते हैं । उनकी देखादेखी हजारों की संख्या में लोगों ने इसी वेशभूषा में निकलने का व्रत ले लिया है । जाहिर है कि डी एम ने ऐसी छाप छोड़ी कि उनका मिशन जन आंदोलन बन गया है ।

मतदान मेला

डीएम बताते  हैं कि वोटिंग के दिन हर मतदान केंद्र मतदान मेला का स्वरूप तय किया गया है । इसमें अधिकारी घराती बन कर मौजूद रहेंगे और वोट के लिए आने वाले हर मतदाता का स्वागत बराती की तरह माला डाल कर करेंगे । मतदान केंद्र पर भव्य शामियाना होगा , कुर्सियां होंगी और जलपान की भी व्यवस्था । डी एम ने बताया कि  हर कोटेदार को अपने इलाक़े के बूथ पर इन  व्यवस्थाओं का जिम्मा सौंपा गया है । इन तमाम तामझाम में बजट की कोई कमी महसूस नहीं पा रही । इसके पीछे भी डी एम का  शानदार मैनेजमेंट है । विभागों में जितने भी ऐसे फंड थे जिनके खर्च का पता नहीं चल पा रहा था उन्हे पहचान कर मतदाता जागरूकता अभियान के लिए डायवर्ट कर दिया गया है ।

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