कोेंच-उरई। क्षेत्र में मवेशियों के इलाज के नाम पर सरकारी पशु चिकित्सकों द्वारा किसानों से सुविधा शुल्क वसूला जा रहा है।
पशु अस्पतालों में दवायें होते हुये भी प्राइवेट मेडिकल स्टोरो से पशु पालक को दवा खरीदने के लिये मजबूर किया जाता है। स्थानीय पशु अस्पताल में पशु चिकित्सक गायब रहते हैं। कभी कभार आते भी है तो 1ः00 बजे के बाद जबकि अस्पताल आने का समय सुबह 8ः00 बजे का है। सरकारी पशु चिकित्सकों के इस रवैये से झोला छाप मवेशी डाक्टरों की भी चांदी हो गयी है। जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।






Leave a comment