उरई| उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की जिला इकाई की जनपद ज़िले के वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी की अध्यक्षता में अनुज भदैरिया के आवास पर शुक्रवार को हुई | काव्यगोष्ठी में तमाम कवि और शायरों की मौजूदगी में जिला कमेटी की घोषणा साहित्य सभा के जनपद संयोजक शफीकुर्रहमान कशफी ने की जिसमें अनुज भदौरिया को अध्यक्ष , सिद्धार्थ त्रिपाठी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम को उपाध्यक्ष , संजीव सरस कोंच को सचिव/महासचिव , राघवेन्द्र कनकने को सहसचिव , अभिषेक श्रीवास्तव सरल को कोषाध्यक्ष , शिखा गर्ग को संगठन मंत्री , दिव्यांशु दिव्य को प्रचार मंत्री घोषित किया गया जबकि मिर्ज़ा साबिर बेग, विमला तिवारी, इंदु विवेक को कार्यकारिणी सदस्य गया | साथ ही 11 सदस्यीय संरक्षक मंडल भी घोषित किया गया जिसमें ज़िले के वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी , डॉक्टर आदि प्रोफेशनल शामिल किए गए हैं |
काव्यगोष्ठी की शुरुआत शफीकुर्रहमान कशफी के संचालन में शिखा गर्ग की सरस्वती वंदना और बेगम अख्तर पुरस्कार से नवाजे जा चुके प्रख्यात गायक मिर्ज़ा साबिर बेग की नातेपाक से हुई | सबसे पहले युवा शायर फ़राज़ ने पढ़ा -शरीफ आदमी से ज़माना है लेकिन,शरीफ आदमी का ज़माना नहीं है | फिर ज़िला प्रोबेशन अधिकारी अमरेंद्र जी ने इन पंक्तियों पर ,समय के साथ बदला है बहुत कुछ,सफेदी बाल की कहती है कुछ कुछ खूब तालियाँ बटोरीं | प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम ने पढ़ा ,सदा चेहरे पे खुशियों से भरी मुस्कान हो हरदम,मिले खुशियाँ ज़माने की सफ़र आसान हो हरदम,संयोजक मशहूर शायर कशफी ने पढ़ा -प्यार का रास्ता तलाश करो,नफरतों की दवा तलाश करो, उलझनें तो सुलझ ही जायेंगीं,गुत्थियों का सिरा तलाश करो जिस पर लोग वाह वाह कर उठे | फिर कृपालु ने पढ़ा,ज़िन्दगी सीने में फिर से भींच लेना चाहता हूं,मौत के जबड़े से जीवन खींच लेना चाहता हूँ | सिद्धार्थ त्रिपाठी ने पढ़ा,गतवर्ष छोटों बड़ों के बीच बढ़ती खाई है,गतवर्ष की ही भांति सबको नववर्ष की बधाई है | हास्य व्यंग के शायर असरार मुक़री की रचना अल्लाह रक्खे सेठ की बीवी को खैर से,खर्चा उसी के माल से चलता है आजकल सुन खूब ठहाके लगे | जावेद कसीम ने पढ़ा,फिक्र भी अब क्या करें तेज़ाब की ,बारिशें ही तो हो रहीं तेज़ाब की |
इस दौरान अनुज भदौरिया, राघवेन्द्र कनकने, परवेज़ अख्तर , शिखा गर्ग, अभिषेक सरल , दिव्यांशु दिव्य ने भी काव्यपाठ कर खूब तालियां बटोरीं | अंत मे वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी ने,है यही कारण कि जग में यह नियम सब को विदित है,प्रेम परिणय मित्रता सम शक्ति वालों में उचित है पढ़ कर साहित्य सभा के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को मुबारकबाद दी | इस दौरान शहर के तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे |







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