उरई।
कालपी के सरकारी अस्पताल में आये मरीज की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इससे लेकर एसडीएम और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डीएस चैधरी ने जांच के बाद संबंधित डाक्टर और एक निजी पैथोलाॅजी संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गयी है।
बताया जाता है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कालपी में उक्त 23 वर्षीय युवक गंभीर हालत में इलाज के लिये लाया गया था। जिसे डाक्टर उदय कुमार ने प्राइवेट पैथोलाॅजी जो कि अस्पताल के पास में ही है ब्लड टेस्ट के लिये भेज दिया। यह पैथोलाॅजी कलीम शाह चलाता है जबकि पैथोलाॅजी का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है।
पैथोलाॅजी की जांच के कारण उसका इलाज शुरू होने में विलंब हो गया। बाद में डाक्टर उदय राज ने उसे जिला अस्पताल के लिये रेफर कर दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पैथोलाॅजी जांच की व्यवस्था ठप्प पड़ी हुयी है और स्ट्रेचर की व्यवस्था भी नहीं थी। युवक का पिता अपनी पीठ पर लादकर उसे अस्पताल से बाहर लाया। इसी बीच जिला अस्पताल लाते समय इलाज में देरी के कारण हालत और ज्यादा बिगड़ जाने से उसकी मौत हो गयी।
मीडिया में खबरें छपने के बाद जिलाधिकारी ने एसडीएम कालपी और एसीएमओ डीएस चैधरी से जांच करायी तो डाक्टर के कारनामे व गैर पंजीकृत पैथोलाॅजी की बात सामने आयी। जिलाधिकारी चांदनी सिंह ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुये डाक्टर उदय राज और अनधिकृत पैथोलाॅजी चलाने वाले कलीम शाह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में डाक्टर हो या अधिकारी हो या प्रभावशाली व्यक्ति किसी को नहीं बख्शा नहीं जायेगा।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बेड़ा गर्क
दावे कुछ भी हों लेकिन जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बेड़ा गर्क नजर आ रहा है। अधिकांश अस्पतालों में अनर्ह प्रभारियों की नियुक्ति की गयी है जिनमें से कई के बारे में सबेरे से ही मस्त हो जाने की शिकायत है। विशेषज्ञ डाक्टर जिनके बारे में निर्देश है कि जिला मुख्यालय पर ही उन्हें रखा जाये उनको सीएचसी में धकेल दिया जाता है। जननी सुरक्षा योजना का जनाजा निकल गया है। तीन दिन पहले जालौन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में दो सिजेरियन डिलेवरी हुयी जिनसे पूरा खर्चा ले लिया गया। यहां तक कि ड्रेसिंग आदि की सामग्री भी उनके परिजनों से अस्पताल के बाहर से खरिदवाई गयी। हालांकि डर के कारण उनके परिजन मुह खोलने को तैयार नहीं हैं। जिला महिल अस्पताल में भी कोई आॅपरेशन और डिलेवरी बिना पैसे लिये नहीं की जाती। सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधायें होते हुये भी पैथोलाॅजी की जांच के लिये मरीज को प्राइवेट सेंटरों पर जाने को बाध्य कर दिया जाता है। सरकारी अस्पतालों की नाक के नीचे अनधिकृत पैथोलाॅजी संचालित हैं फिर भी विभाग के उच्चाधिकारी सोये रहते हैं। मेडिकल काॅलेज से लेकर जिला और अन्य अस्पतालों के ज्यादातर डाक्टर खुलेआम बाहर प्रेक्टिस कर रहे हैं। मरीजों की जिंदगी भगवान के भरोसे कर दी जाने के इन किस्सों के बाद भी अस्पतालों में सुंदर व्यवस्थाओं के ढोल पीटे जा रहे हैं जिनसे लोगों में बड़ी नाराजगी है।







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