27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ceउरई। जिन्दगी मुख्तसर है, इसे नफरत, गफलत और गुनाहों में न गुजारों बल्कि जिन्दगी अल्लाह की मर्जी के मुताबिक सदाचार व परोपकार में जियो।
यह बात जामे समदिया फफूंद शरीफ के सहानी सफीर मुफ्ती अनफासुल हसन चिश्ती ने यहां तिलक नगर में पैगम्बरे इस्लाम हजरत मुहम्मद (सल) के कथन (हदीस) को आम जन तक पहुंचाने वाले कार्यक्रम दर्स-ए-हदीस को खिताब करते हुए कही। मुफ्ती साहब ने कहा उसकी जिन्दगी सफल कहलाने की हकदार है, जिसने दुनियां में अपने कर्तव्यों का पालन ठीक तरह से किया। अल्लाह के प्रति हमारा कर्तव्य है कि अल्लाह की मर्जी के मुताबिक आचरण करें। अल्लाह के बंदों को नाहक न सताये, जमीन पर घृणा का ताण्डव न मचायें। अल्लाह की बनाई दुनियां को अपने आचरण से खराब न करें। अल्लाह के हुक्म के मुताबिक पैगम्बरें इस्लाम द्वारा दिखाये मार्ग को अपनायें। जो कर्तव्य मानव जाति, सृष्टि के प्रति है, हम उन्हें भी अदा करें और जो कर्तव्य मां, बाप, पड़ोसी, रिश्तेदारों के प्रति है, उन्हें ठीक-ठीक अदा करें। जो इन कर्तव्यों को जिस निष्ठा से अदा करता है, वह अल्लाह की रहमतों का उतना ही हकदार बनता है। अल्लाह और सृष्टि के प्रति हक अदा करने वाला ही रहमत के साये का हकदार होगा। मुफ्ती साहब ने समाज में बढ़ रही बुरी प्रवृत्तियों आतंकवाद, आडम्बरवाद, नैट के दुरुपयोग, सिलसिलों के नाम पर बढ़ती संकीर्णता व अमीर-गरीब से जुदा-जुदा व्यवहार तथा धनवान को श्रेष्ठ समझने की मानसिकता पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि अभी सुधार का मौका है, अल्लाह के वास्ते सुधर जाओं। तन्जीम अहले सुन्नत के इस कार्यक्रम में हाफिज जब्बार (इमाम स्टेशन वाली मस्जिद), हाफिज मंजूर (इमाम नबी की मस्जिद), मुफ्ती आफताब आलम, कारी मुस्तकीम, हा. जुनैद, हा. इन्तिखाब, मु. मुही आजम, अजमेरी चिश्ती, ताजउददीन, मुजीब अंसारी, फसीहउददीन, जावेद अंसारी, राशिद खान, हाजी जिक्र उल रहमान, जमाल छोटू (बैटरी वाले), मुमताज रहमानी आदि ने व्यवस्था संभाली। सै. तौसीफ चिश्ती ने आभार व्यक्त किया। इस तारतम्य का अगला जलसा 16 मार्च को होगा।

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