IMG-20160903-WA0440उरई। समाजवादी पार्टी के आला कमान ने एक अप्रत्याशित फैसले के तहत पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी को छह वर्ष के लिए पार्टी के लिए बाहर कर दिया गया है। हालांकि इसके आसार जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के समय ही बन गये थे। लखनऊ में हुई पार्टी की एक बैठक में मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसका फैसला लिया। जिला मुख्यालय पर पार्टी के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव ने इसकी पुष्टि कर दी है।
समाजवादी पार्टी में जिला स्तर पर गुटबाजी चरम सीमा को पार कर गई थी। इसके बाद सपा आला कमान का अनुरागी से मोहभंग शुरू हो गया था। अनुरागी के दिन पार्टी में गर्दिश में आ गये हैं यह उसी समय पता चल गया था जब धीरेंद्र यादव को अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया गया था। आसना खातून के चुनाव में इतनी उथल-पुथल मची लेकिन अनुरागी जिले में ही जमे बने रहे। वजह यह थी कि आला कमान उन्हें दुत्कार चुका था जिससे वे पहले की तरह बात-बात में लखनऊ बात करने और लखनऊ पहुंचने से कतराते रहे। लेकिन यह बात दबीछुपी रही।
मुसलिम वोटों को थामने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के बाद पार्टी के फैसले के खिलाफ वोट देने या दिलवाने वाले चार नेताओं को सपा आला कमान ने जब बाहर किया उसी समय अनुरागी को भी एक मैसेज भेजा गया था कि अगर मुसलिम समाज के लोगों का गुस्सा न थमा तो तुम्हारे ऊपर भी गाज गिरा दी जायेगी। अनुरागी तभी से घबराहट में थे। इस बीच स्वतंत्र भारत में सुरेश खरकया ने जिस तरह कदौरा क्षेत्र में मुख्यमंत्री का पुतला अपमानित करने के साथ फूंके जाने की खबरे छापी और उनसे अनुरागी का संबंध जोड़ा उसके कारण अनुरागी की पार्टी से निष्कासन की भूमिका और ज्यादा मजबूती से बनती गई।
समाजवादी पार्टी के जनाधार के दो मुख्य स्तंभ हैं एक यादव और एक मुसलिम। इसलिए मुसलिम स्तंभ को साधने की पहले कोशिश की गई लेकिन इसकी प्रतिक्रिया यादव स्तंभ में जिले भर में पार्टी के प्रति गुस्सा फूट पड़ने के रूप में सामने आई। सपा आला कमान यादव जनाधार के छिटकने को अनदेखा करने की स्थिति में नही हो सकता। इस कारण मुसलमानों को मरहम लगाने के लिए चार नेताओं के निष्कासन के बाद अनुरागी का निष्कासन करके यादव जनाधार को मरहम लगाया गया है।

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