जालौन-उरई। धर्म की स्थापना और दुष्टों के विनाश के लिए ही प्रभु का मानव काया में इस धरा अवतरण होता है। जब-जब स्थितियां मनुष्य के नियंत्रण के बाहर हो जाती हैं। तब-तब वह विराट सत्ता विषम परिस्थितयों में संतुलन पैदा करने के उददेश्य से सजीव साकार रूप में अवतरित होती हैं। यह बात ग्राम लौना में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के चैथे दिन कथा व्यास आचार्य रवि महाराज ने उपस्थित भक्तों के समक्ष कही।
ग्राम लौना में साप्ताहित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसके चैथे दिन कथा व्यास आचार्य रवि महाराज ने उपस्थित भगवत प्रेमियों के समक्ष कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि जब धरती पर अत्याचार बढ़ा तब देवताओं ने ब्रह्मा की शरण ली। ब्रह्मादि देवों ने नारायण से प्रार्थना की कि नाथ अब क्रपा कीजिए अवतार लीजिए तब नारायण ने देवताओं को अवतरित होने के लिए आश्वस्त किया। इधर मथुरा में वासुदेव देवकी का विवाह हुआ। पावन बेला में देवकी ने आठवां गर्भ धारण किया। शुभ घड़ी आई और चंद्र रोहिणी नक्षत्र में कमल नयन श्याम सुंदर चतुर्भज नारायण भगवान बालक का रूप लेकर वासुदेव देवकी के समक्ष कारागार में प्रकट हुए। वासुदेव जब प्रभु को टोकरी में रखकर गोकुल ले जाने लगे तो सारे बंधन टूट गए। जो प्रभु का हो जाए अर्थात परम सत्य की ाक्षा को तत्पर को जाए तो उसके लिए कारागार तो क्या मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। अतः जीव यदि सत्य, धर्म त्याग और तप का संकल्प लेकर इनकी रक्षा करते हुए जीवन पथ पर अग्रसर हो जाए तो मोक्ष उससे दूर नहीं रहता। इस मौके पर कथा पारीक्षित विद्यावती एवं क्रष्ण पाल सिंह सेंगर के अतिरिक्त सैंकड़ों श्रोताओं ने क्रष्ण जन्म की भव्य झांकी का दर्शन करते हुए कथा रसपान किया।

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