जालौन। आज मित्रता मात्र स्वार्थ पर आकर टिक गई है लेकिन मित्रता का संबंध एक ऐसा संबंध है जिससे बड़ा संबंध ना तो कोई है और ना ही होगा। मित्रता अपने आप में एक परिपूर्ण रिश्ता है। भागवत में कृष्ण और सुदामा चरित्र में स्वयं कृष्ण ने इस संसार को सच्ची मित्रता का पाठ पढ़ाया है। कृष्ण के राजा होने के बाद भी वर्षों बाद सुदामा को पहचानना और उन्हें अपने समान आदर दिलवाना और प्रेम में चावल खाकर दो लोकों का राजपाठ देना सच्ची मित्रता को इंगित करता है। यह बात श्रीबिरियाखेरा हनुमान मंदिर परआयोजित 11 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ एवं 108 भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पं. रमाकांत व्यास ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कही।
सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कथा व्यास पं. रमाकांत व्यास ने बताया कि सुदामा की मित्रता भगवान के साथ न्:िास्वार्थ थी। उन्होंने कभी उनसे सुख साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की लेकिन सुदामा की पत्नी द्वारा पोटली में भेजे गए चावलों ने भगवान श्रीकृष्ण से सारी हकीकत कह दी और प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को सबकुछ प्रदान कर दिया। भक्त प्रहलाद के पास कोई धन दौलत नहीं थी सिर्फ भाव व विश्वास था। सच्ची निष्ठा, प्रेम था तो भगवान को नृसिंह रूप धारण कर खंभे में से प्रकट होना पड़ा। हनुमान जी की तरह दास बनकर प्रभु की सेवा करो, सुदामा जैसी यारी करो, राजा बलि की तरह आत्मा से अपना सर्वस्व अर्पण करो यह भगवत भक्ति है। भागवत ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा का वाचन हुआ तो मौजूद श्रद्धालुओं के आखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने कहा श्रीकृष्ण भक्त वत्सल हैं। सभी के दिलों में विहार करते हैं। जरूरत है तो सिर्फ शुद्ध हृदय से उन्हें पहचानने की। समापन के अवसर पर कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि माता पिता का आदर करें, सूर्य को अध्र्य अर्पण करें, भगवान को भोग लगाएं, गाय को रोटी दें और अपने आत्मविश्वास को हमेशा कायम रखें। अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा अच्छे कार्यों के लिए अवश्य निकालें। उन्होंने भगवत गीता के प्रथम और अंतिम श्लोक के साथ इस कथा का समापन किया। इस मौके पर पुजारी नानक चंद मिश्रा, यज्ञाचार्य जय प्रकाश शास्त्री, यज्ञ यजमान राममोहन सोनकिया, भागवत कथा यजमान श्याम सुंदर सोनी, अनिल शिवहरे, मनोज गुप्त, लालन ताम्रकार, पम्मू महाराज, शशि अग्रवाल, रत्ना शिवहरे, रानी, नीतू गुप्ता, निशा माहेश्वरी, सुनीता ताम्रकार, हेमलता सिंह, आदि सहित सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
विशाल भंडारे का हुआ आयोजन
श्रीबिरियाखेरा हनुमान मंदिर पर आयोजित 11 कुंडीय महायज्ञ एवं 108 श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें नगर क्षेत्र के हजारों के संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद चखा। इसके अलावा मंदिर पर पुजारी ननकू महाराज की उपस्थिति में अखंड रामायण का भी पाठ किया गया। भंडारे में मनसुख दादी ,बालजी गुर्जर, नरेंद्र मास्टर, गिरीश गुप्ता, प्रदीप द्विवेदी, मधु सिंघल, शशिकांत द्विवेदी, दीपक श्रीवास्तव, दीपक मित्तल, रूपनारायण द्विवेदी, सुरेश चंद्र, राजा सिंह सेंगर, रामराजा निरंजन, पंकज अग्रवाल आदि ने सहयोग किया।





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