सुलतानपुर के पुलिस अधीक्षक डा0 अरविन्द चतुर्वेदी को खाकी को नई पहचान देने वाले अफसर के रूप में नवाजा जा रहा है। बारांबकी के बाद उनके इस तरह के प्रयासों और पहल का डंका अब सुलतानपुर में गूंज रहा है। उन्होने थानों को मधुमक्खी पालन के कार्यक्रम से जोडने की शुरूआत करके विभाग के लिये प्राइवेट फण्ड जुटाने की जो कोशिश की है उसे पूरे प्रदेश में कौतूहल के साथ देखा जा रहा है।
पुलिस जनों के परिवारों में शहद घोलेगा मिशन
उन्होने अपने इस कार्यक्रम को मधु मिशन का नाम दिया है जिसका श्रीगणेश गत 23जनवरी को जिलाधिकारी रवीश गुप्ता की उपस्थिति में कुडवार और धम्मौर थानों पर 25-25 मधुमक्खी के डिब्बे रखवाकर की गयी । डा0 चतुर्वेदी बताते है कि उनके विभाग में जनपद स्तर पर प्राइवेट फण्ड बनाये जाने की व्यवस्था है जिससे प्राप्त धनराशि पुलिस लाइन्स और थाना चैकियों के फुटकर कार्यो व कर्मचारियों एवं उनके परिवार के कल्याण के लिये इस्तेमाल की जा सकती है। बैण्ड फण्ड , पीसीओ फण्ड , आरओ प्लान्ट फण्ड और कैन्टीन फण्ड आदि प्रचलित फण्ड है जिनकी आमदनी से कर्मचारियों और उनके परिवार के लिये सुख सुविधा की व्यवस्था की जाती है। एक गार्डन फण्ड भी है जिसमें पेडों पर फल तैयार कर उनकी बिक्री , पुलिस भूमि पर की जाने वाली खेती अथवा पुलिस भूमि के किसी व्यवसायिक उपयोग से होने वाली आय को प्राइवेट फण्ड में जमा किया जाता है। इसी कडी में डा0 चतुर्वेदी ने थानों के लिये मधु मिशन का आगाज किया है।
काम एक , वरदान अनेक
इसके लिये उन्होने बारांबकी के मधुमक्खी वाला के नाम से विख्यात युवा उद्यमी निमित सिह का सहयोग लिया । उन्होने बताया कि मधु मक्खी के इन डिब्बो से शहद के अतिरिक्त तीन अलग अलग बाई-प्रोडक्ट भी प्राप्त होते है जिनमें बीजवैक्स, मधुमक्खियों के पैरों में लगा रहने वाला फूलो का अत्यधिक प्रोटीन युक्त पराग पोलन और परपोलिस जिसमें पेड के प्राकृतिक गौंद को मधु मक्खियां अपने डिब्बो के छिद्रो को सील करने के लिये लाती है जो बहुत इम्युनिटी वर्धक होता है।
थानों की मधुमक्खियों का इतिहास
डा0 चतुर्वेेदी ने बताया कि पुलिस लाइन्स और थानों पर पाली जाने वाली मधु मक्खियां एपिस मेलिफेरा प्रजाति की है जो पहली बार भारत में 1994 में कांगडा , हिमांचल प्रदेश में यूरोप से लायी गयी थी । उसके बाद पंजाब एग्रीकल्चर यूनीवर्सिटी में इसके प्रजनन का शोध हुआ और धीरे- धीरे पूरे उत्तर भारत के मधु मक्खी पालकों ने इन्हंे रखना शुरू किया।
कैसे मधुमक्खियां बनाती है शहद
यह भी रोचक तथ्य है कि यह मधु मक्खियां अपने 45 दिन के अल्प जीवन काल में तीन प्रमुख कार्य करती है। पहला 5 दिन की मधुमक्खी नर्स मधुमक्खी के रूप में उपस्थित लार्वा को फीड करती है। दूसरा अगले 10 दिन तक मधुमक्खी डिब्बो के आस पास चैकीदारी का काम करती है। तीसरा 15 दिन की मधुमक्खी फ्रोजेन के रूप में अपने डिब्बों से लगभग 5 किलो मीटर की परिधि मंे भोजन , नेक्टर तथा पोलन लाने का काम करती है। मधुमक्खी के पेट में दो भाग होते है , एक में वह स्वयं जीवित रहने के लिये खाना रखती है और दूसरे हनी स्टमक में नेक्टर रखती है जिसे फ्रक्टोज , शुक्रोज और ग्लूकोज में विभाजित कर शहद तैयार करती है और अपने डिब्बे के ऊपरी भाग में शहद जमा करती है।
डीएम कार्यक्रम में हो गये अभिभूत
कार्यक्रम में आकर जिलाधिकारी रवीश गुप्ता इतने प्रभावित हुये कि उन्होने कहा कि पुलिस की इस पहल का अनुकरण कर वे राजस्व एवं विकास विभाग के परिसर में मधुमक्खी पालन पर विचार करेगें। निमित सिंह ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होने बताया कि पिछले 6 वर्ष से मधुमक्खी पालन कर शानदार कमाई कर रहे है। नगर क्षेत्राधिकारी सतीश शुक्ला और कुडवार के थानाध्यक्ष अरविन्द पाण्डेय भी कार्यक्रम में मौजूद रहे ।
अपशकुनकारी खाकी की पहचान को उद्धारक में बदला
इसी क्रम में उनके मिशन कायाकल्प को भी खूब सराहा जा रहा है जिसे उन्होने बाराबंकी मे भी सफलतापूर्वक चलाया था और नकारात्मक भूमिका तक सिमटी रहने की वजह से कई अर्थो में अभिशाप की निगाह से देखी जाने वाली खाकी को उद्धारक की पहचान दिला डाली। इस अभियान का मकसद अपराधी तबको के रूप में कलंकित समुदायों का रूख रचनात्मक अभियान की ओर मोडकर समज की मुख्य धारा में शामिल करना है। सुलतानपुर देहात कोतवाली का पकरी गांव ऐसा ही बदनाम गांव था जहां चैपाल लगाकर उन्होने लोगोे को पे्ररित किया कि वे अपराधों को जीविकोपार्जन का जरिया मानने की सोच छोडकर सम्मानित व्यवसायों की ओर मुखातिब हो । इसमें जिलाधिकारी रवीश कुमार गुप्ता ने भी पूरी रूचि दिखायी और राष्ट्रीय आजीविका मिशन व कौशल विकास मिशन को इस गांव के लोगो के लिये वैकल्पिक रोजगार में मदद हेतु जुटा दिया । पुलिस अधीक्षक डा0 अरविन्द चतुर्वेदी ने चैपाल के माध्यम से गांव के लोगो को अपने बच्चों को शिक्षा से जोडकर जीवन सुधारने की ओर प्रेरित किया । उन्होने कहा कि यहां लोगो को जागरूक करने के साथ साथ जिलाधिकारी की मदद से विभिन्न योजनाओं से भी आच्छादित करेगें ।







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