जालौन। भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चार आरोपितों को समन जारी कर 20 नवंबर 2026 को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। परिवाद संख्या 517/2023, गिरजा शंकर द्विवेदी बनाम राजेन्द्र प्रसाद आदि में अदालत ने 14 सितंबर 2026 को आदेश पारित करते हुए आरोपितों को भारतीय दंड संहिता की धारा 465, 468 और 471 के तहत तलब किया है।

परिवाद के अनुसार मौजा मकरौरा, थाना कुठौंद, परगना माधौगढ़ में परिवादी की कृषि भूमि है। आरोप है कि उनके भतीजे राजेन्द्र प्रसाद, बृजेन्द्र उर्फ कम्मू और उमेशचन्द्र ने भूमि पर कब्जा या उसे हड़पने के उद्देश्य से परिवादी के भाई लक्ष्मी नारायण के कथित फर्जी हस्ताक्षर से दस्तावेज तैयार किए और उन्हें परगनाधिकारी माधौगढ़ की अदालत में अपील के साथ प्रस्तुत किया। परिवाद में घटना 29 दिसंबर 2010 को तहसील परिसर माधौगढ़ में होने का उल्लेख किया गया है। परिवादी के अनुसार लक्ष्मी नारायण ने बाद में शपथ-पत्र देकर दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया।

मामले में थाना माधौगढ़ में मुकदमा संख्या 868/2012 के तहत धारा 419, 420, 467, 468 और 471 आईपीसी में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस विवेचना के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई। इसके विरुद्ध परिवादी ने विरोध याचिका प्रस्तुत की, जिसे अदालत ने 29 सितंबर 2023 को स्वीकार करते हुए मामले को परिवाद के रूप में दर्ज किया। इसके बाद परिवादी तथा साक्षी रामकिशोर और लक्ष्मी नारायण के बयान दर्ज किए गए।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि समन जारी करने के स्तर पर आरोपितों का दोष निर्धारित नहीं किया जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथमदृष्टया अपराध के आवश्यक तत्व बनते हैं या नहीं। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कूटरचना तथा फर्जी दस्तावेज को वास्तविक बताकर राजस्व न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने का प्रथमदृष्टया आधार पाया। हालांकि धारा 467, 419 और 420 के तहत पर्याप्त आधार नहीं माना गया।

आदेश में कमलेश उर्फ कब्नू की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। अदालत ने साक्षियों के बयानों के आधार पर उसकी भूमिका को प्रथमदृष्टया विचारणीय माना।

अदालत ने राजेन्द्र प्रसाद, बृजेन्द्र उर्फ कम्मू, उमेशचन्द्र और कमलेश उर्फ कब्नू को धारा 465, 468 और 471 आईपीसी के तहत समन जारी करते हुए 20 नवंबर 2026 को हाजिर होने का आदेश दिया है। अदालत ने परिवादी को नियमानुसार पैरवी करने के निर्देश भी दिए हैं। आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट जावेद खातैन (आई.ओ. कोड-यूपी3693) ने पारित किया।

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