Milky_way_broken_European (1)उरई। बड़ी देर कर दी हुजूर आते-आते….. सूखे से पीड़ित बंुदेलखंड के किसानों को राहत देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने अपनी अंटी खोलने में शायद देर कर दी। जिसका नतीजा है कि दुखी किसान अभी भी मायूसी में मौत को गले से लगाने से अपने को रोक नही पा रहे। एक और किसान ने जालौन जिले में सूखे से हुई बर्बादी के विषाद में शुक्रवार को ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली।
भुआ स्टेशन के पास झांसी आ रही पैसेंजर ट्रेन के सामने अचानक कंूद पड़े बारा कुसमरा निवासी प्रभू बाल्मीकि (55वर्ष) के शरीर के चिथड़े-चिथड़े उड़ गये। प्रभू के दो शादीशुदा लड़के हैं और उसके भरेपूरे इस परिवार में जीविका के नाम पर केवल एक एकड़ खेती है। पानी न बरसने से खरीफ के सीजन में उसके खेत खाली रह गये थे। रबी में उसने नहर से जैसे-तैसे खेत सींचकर पलेवा किया और उसमें फसल बो दी थी। लेकिन उसकी किस्मत दगा दे गई जिसकी वजह से एक दाना नही उगा। वह रोज सुबह खेत देखने के लिए आता था जिससे उसका तनाव बढ़ता जाता था। आज सुबह भी वह खेत देखने के लिए ही निकला और खाली खेत का मंजर देखकर पगलाई सी हालत में पटरी-पटरी चलते भुआ स्टेशन के नजदीक बड़ागांव तक पहुंच गया। जहां उसे सामने से झांसी की ओर से आ रही पैसेंजर ट्रेन दिखी। वह इतना व्यथित था कि एक क्षण में उसने ट्रेन के आगे कूंदकर जिंदगी से निजात पाने का फैसला ले लिया।
पुलिस का डैडबाॅडी से बेदर्द सुलूक
खबर पाकर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन उसने मृतक के साथ भी बेदर्दी का सुलूक करने में हिचक नही की। जिससे परिजन बहुत आक्रोशित थे। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मौके पर कफन की व्यवस्था से बचने के लिए डैडबाॅडी का पंचनामा मौके पर नही कराया। यही नही परिजन ही किराये पर मैजिक करके शव को पोस्टमार्टम हाऊस तक लाये। वहीं पुलिस ने पंचनामें की औपचारिकता पूरी की।
एसपी का आश्वासन निकला खोखला
गौरतलब है कि डैडबाॅडी को पोस्टमार्टम हाऊस तक पहुंचाने की व्यवस्था हमेशा मृतक के परिजनों को ही करनी पड़ती है। जबकि परिवार गरीब होने पर उसे इसके लिए कर्जा तक लेना पड़ता है। कुछ दिनों पहले जब अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया था तो पुलिस अधीक्षक एन. कोलांची ने बताया था कि विभाग ने हर जिले की तरह उनके यहां भी शव वाहन की व्यवस्था की है। इसलिए आगे से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि डैडबाॅडी को विभागीय शव वाहन से ही पीएम हाऊस तक पहुंचाया जाये। लेकिन उनका यह आश्वासन ढाक के तीन पात साबित हो रहा है।

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