उरई। बेरहम ससुरालियों ने दहेज पिपासा पूरी न करने से झल्लाकर नवबधू को उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया। फिर भी वह जिन्दा बच गयी तो उसे अस्पताल नहीं ले गये वह घर में ही तड़प तड़प कर मरने को मजबूर हो रही थी लेकिन किसी तरीके से खबर उसके मायके पहुंच गयी। तब उसके मां-बाप आये। पुलिस की सहायता से नवबधू को ससुरालियों के चंगुल से निकालकर अस्पताल भिजवाया जा सका। पुलिस ने उसके पति को हिरासत में ले लिया है।
चैरसी निवासी राजू की पुत्री गुडि़यां उर्फ सुनीता का विवाह डेढ़ वर्ष पहले मिनौरा के जगराम के साथ हुआ था। जगराम और उसके घर के लोग मिले दहेज से संतुष्ट नहीं थे इसलिये वे आये दिन गुडि़या को प्रताडि़त करते थे। इसके बावजूद गुडि़या उनकी मांग के मुताबिक और ज्यादा दहेज व सामान मायके से लाने के लिये रजामंद नहीं हुयी तो तीन दिन पहले उन्होंने वहशियाना कदम उठाकर गुडि़या को जिन्दा जलाने की कोशिश की। गुडि़या बुरी तरह झुलस जाने के बावजूद किसी तरह बच गयी तो उन्होंने उसे कैद कर लिया और इलाज कराने की बजाय तिल तिलकर उसके मर जाने का इंतजार करने लगे। इसी बीच गुडि़या के पिता राजू और मां अलका को पता चला तो वे लोग दौड़े दौड़े आये लेकिन ससुरालियों ने उन्हें गुडि़या से नहीं मिलने दिया। इसके बाद जब वे चार पांच बिचवानियों को लेकर पहुंचे तब गुडि़या उनको मिल पायी। इसी बीच उनकी सूचना पर दरोगा मनोज गुप्ता भी सदलबल मिनौरा पहुंचे। जहां से गुडि़या को निकालकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गांव में खोजबीन पर पति जगराम भी मनोज गुप्ता के हत्थे चढ़ गया। कोतवाली में उससे पूछताछ की जा रही है।







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