उरई। जल निगम के इंजीनियर सूखा राहत के तहत जिले में पेयजल योजनाओं के लिये हो रही बजट की बरसात से अपनी जेबें गर्म करने में लगे हुये है। उनके द्वारा अधिकांश कार्यों का पैसा हड़प कर आने वाल पीढि़यों तक की खुशहाली का इंतजाम किया जा रहा है। जल निगम के अभियंताओं की इस कफन खसोट नीयत पर लोग उन्हें तो कोस ही रहे है सरकार को भी कम लानत नहीं भेजी जा रही है।
जल निगम की कार्यशैली का एक नमूना वार्ड नम्बर 23 नया पाठकपुरा में लगवाये गये हैण्डपम्प की हालत में देखा जा सकता है। यह हैण्डपम्प तीन महीनें पहले लगाया गया था। हैण्डपम्प का बाहर बहने वाला दूषित पानी भूगर्भ में न जाये इसके लिये हर हैण्डपम्प के स्टीमेट में पक्का प्लेटफार्म उसके इर्दगिर्द बनाने का प्रावधान जुड़ा रहता है लेकिन जल निगम के अभियंता प्लेटफार्म बनाने का पैसा डकार जाते है। जिससे उसकी सुरक्षा का प्रयोजन सिद्ध नहीं हो पाता।
सुदूर गांवों में यह हो तो कहा जा सकता है कि अधिकारियों को खबर नहीं होगी लेकिन जिला प्रशासन की नाक के नीचे मुख्यालय पर भी जल निगम के अभियंता इस हरकत से बाज नहीं आ रहे तो क्या यह माना जाये कि अभियंता जो बजट हड़पते है उसमें से जिला प्रशासन को भी चढ़ौती पहुंचती है। बहरहाल मरघट की बस्ती के पीछे लगे इस हैण्डपम्प पर लोग कपड़े भी धोते है जिससे साबुन का पानी जमीन के अन्दर जाता रहता है और लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी संकल्प को धूमिल करता रहता है। शायद उक्त बस्ती में बढ़ रही बीमारियों की यही वजह है। मोहल्ले वालों ने बताया है कि वे जल भराव से हैण्डपम्प के नीचे धसकने की शिकायत कई बार जलनिगम कार्यालय में कर चुके है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुयी है।







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