उरई। अपना दल ने भी बुन्देलखण्ड में अपनी नजरें गड़ा दी हैं। पार्टी की सांसद अनुप्रिया पटेल ने रविवार को यहां पत्रकार वार्ता में बुन्देलखण्ड में सूखे की स्थिति को अत्यन्त दयनीय बताते हुए यहां हालात विदर्भ से भी ज्यादा खराब बताये। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसे लोकसभा और विधानमंडल में उठायेगी। हालांकि उन्होंने यह मानने से इन्कार कर दिया कि बुन्देलखण्ड में सूखा राहत के लिये केन्द्र ने प्रदेश सरकार को कोई मदद नहीं दी है। उन्होंने केन्द्र की मदद के आंकड़े पत्रकारों के सामने गिना डाले।
बुन्देलखण्ड सियासत का अखाड़ा बन चुका है। कांग्रेस, भाजपा और सपा के शीर्ष नेताओं के इस इलाके में दौरे के बाद छोटी पार्टियों ने भी इसमें अपनी सरगर्मियां तेज कर दी हैं। भाजपा के सहयोगी दल अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल भी सूखे के सर्वे के बहाने बुन्देलखण्ड में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुट गयी हैं। उन्होंने बताया कि वे ललितपुर से दौरा करके लौटी हैं। इसके बाद घाटमपुर और बाद में बांदा जायेंगी। गौरतलब है कि उनके पिता सोनेलाल पटेल के समय अपना दल ने जिले में पैर पसारने की कोशिश की थी जिसके परिणाम उन्हें उत्साहवर्धक मिले थे। अनुप्रिया पटेल अपने पिता के इस काम को आगे बढ़ाने में जुट गयी हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि इस इलाके में वे भाजपा के साथ ही मिलकर काम करेंगी।
अनुप्रिया पटेल ने जिला पंचायत और ब्लाक प्रमुख के चुनाव जीतने के लिये सपा पर सत्ता के दुरुपयोग और गुंडागर्दी का आरोप लगाया। उन्होंने राज्य के बजट में बुन्देलखण्ड के लिये तिगुनी धनराशि के प्रावधान को झुनझुना करार दिया। कहा कि चार साल तो अखिलेश सरकार ने कुछ किया नहीं। चुनावी वर्ष में घोषणायें कर दी हैं जिनका क्रियान्वयन उनके वर्तमान कार्यकाल में संभव नहीं है। जेएनयू प्रकरण में अनुप्रिया पटेल ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोकने के लिये सभी दलों से मिलकर काम करने की अपील की। हरियाणा के जाट आन्दोलन का उन्होंने वैसे तो समर्थन किया लेकिन यह कहा कि मण्डल आयोग की रिपोर्ट पिछड़ों को आरक्षण के मामले में मुकम्मल दस्तावेज है। जाट यह देखें कि वे इस रिपोर्ट में जो मानक तय किये गये हैं उनके मुताबिक शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं कि नहीं।








Leave a Reply