उरई। कश्मीर में आतंकवादियों के हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान भोला सिंह राजावत (40 वर्ष) के पैतृक गांव रेंढऱ थाना क्षेत्र अन्तर्गत कन्हरपुरा में उनके परिवार में आज माहौल गमगीन तो था लेकिन परिजन इस पर फख्र महसूस कर रहे थे कि देश के लिये बलिदान होकर भोला सिंह ने पूरे खानदान का माथा ऊंचा कर दिया है।
भोला सिंह चार भाई थे और सभी भाई अभी तक एक ही साथ रहते हैं। उनके भाई कौशल सिंह, ऊदल सिंह और सत्येन्द्र सिंह पत्रकारों की टीम से बात करते समय भाव विह्वल हो गये। उनका गला रुंध गया और आंखें बहने लगीं। इसके बावजूद वे यह कहने से नहीं चूके कि देश के लिये जान गंवाने का मौका विरलों को ही मिलता है। उन्होंने बताया कि गत 19 जनवरी को उनकी बड़ी पुत्री मोहिनी का विवाह हुआ था। जिसमें वे आये थे उस समय बहुत खुश थे। उन्होंने बताया कि कश्मीर की ड्यूटी 24 घंटे जान हथेली पर रखकर करनी पड़ती है पर उन्हें नाज है कि उनको देश के लिये जोखिम उठाने का मौका मिला है। उन्होंने कहा था कि तीन महीने बाद वे फिर घर आयेंगे लेकिन जिस तरह की परिस्थितियां कश्मीर में हैं उसमें उनके साथ कुछ हो जाये तो घर के लोगों को दुखी होने की बजाय गर्व करने की जरूरत होनी चाहिये ताकि आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके।
शहीद भोला सिंह अपने पीछे मोहिनी के अलावा दो और संतानें कु.तन्नू (16 वर्ष) और 6 वर्षीय बालक श्लोक व पत्नी सुधा को छोड़ गये हैं। उनका पार्थिव शरीर अभी गांव नहीं आ पाया था। बताया गया कि सीआरपीएफ के अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को गांव लाकर पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की बात कही।







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