उरई। महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार परियोजना ब्लाक डकोर में अव्यवस्था व भ्रष्टाचार का बोलबाला यहां तक कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के यूनियन पदाधिकारी भी भ्रष्टाचार में सह भागीदार पूर्व में पदस्थ बड़े बाबू रामसिंह राजपूत के समय में कार्यकत्रियों को तीन सौ रुपया सुविधा शुल्क मुख्य सेविकाओं को देना पड़ता था और पच्चीस-तेइस बोरी दी जाती थी। किन्तु जब से महिला क्लर्क अनुराधा गुप्ता आई है इनका भी सुविधा शुल्क जुड़ जाने से अब चाहे आठ बोरी पंजीरी की हो चाहे तेरह बोरी व अट्ठारह बोरी पंजीरी की हो सुविधा शुल्क रुपया सात सौ पहले हो फिर पुष्टाहार ले जाओ कभी-कभी तो पैसे के आभाव में वही स्थानीय लोगों को बोरी बेचकर मुख्य सेविकाओं को देना पड़ता है। तब कहीं पंजीरी की बोरी दी जाती है। हाटकुक योजना में तीन से छह माह का पैसा ब्लाक डकोर में मिलता जिसमें अगर छब्बीस सौ आया है तो तेरह सौ मुख्य सेविकाओं को देना पड़ता है। ऊपर से दो सै रुपया प्रति आंगनवाड़ी कार्यकत्री को बिल बाउचर बनवाने के देना पड़ते है। कार्यकत्रियों द्वारा नाम न छापने का कहकर यह जानकारी दी साथ ही मुख्य सेविकाओं द्वारा कहा जाता है चाहे केन्द्र चलाओ अथवा न चलाओ जांच आयेगी हमारे पास आयेगी क्योंकि परियोजना अधिकारी डकोर से लेकर महिला बाल विकास प्रोग्राम अधिकारी जनपद जालौन को व्यक्ति विशेष के माध्यम से पैसा भेजा जाता है। वह पैसा प्रोग्राम अधिकारी या परियोजना अधिकारी के पास पहुंचाया जाता है या इनके नाम पर मुख्य सेविकाएं ही कार्यकत्रियों को लूट रही है। मुख्य सेविकाओं द्वारा चार पांच वर्षो से पंजीरी ढुलाई भाड़ा कार्यकत्रियों का नही बनाया जाता है जिसमें कार्यकत्रियों का ढाई से तीन सौ रुपया का खर्च आता है। जिलाधिकारी चाहे तो अपने निजी साधन से जांच करवा सकती है इसलिए जनपद जालौन की कोई भी आंगनवाड़ी केन्द्र सुचारू रूप से नही चल पाया। वर्षो से इसी जनपद में कार्यरत होने से भी हौसले बुलंद है। इनके स्थानांतरण अन्य जनपदों में किए जाने से सुधार की संभावना है।







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