20160512_154756उरई। कुओं के संरक्षण का सरकारी संकल्प केवल मीडिया की सुर्खियों और मंच के भाषणों तक सीमित है। जबकि हकीकत में कुओं के अस्तित्व को बेखौफ होकर मिटाया जा रहा है और निकम्मा प्रशासन टुकुर-टुकुर देखने के अलावा इन्हें बचाने के लिए कुछ नही कर रहा।
तहसील दिवस में मंगलवार को एक मामला काबिलपुरा ग्राम पंचायत के ग्राम फूलपुरा का सामने आया। कौशल किशोर, लाखन सिंह, कैलाश नारायण, राजेंद्र सिंह, किशन लाल, लालजी, शिवराम सिंह, राजकिशोर आदि ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी संजय कुमार सिंह को शिकायती पत्र देकर बताया कि उनके गांव के बीच में एक ही कुआं है जिसमें कुछ वर्षों तक मीठा पानी निकलता था और गांव के लोग मुख्य रूप से इसी पानी को पीकर अपनी प्यास संतुष्ट जनक तरीके से बुझाने के साथ-साथ निरोगी होने का आशीर्वाद भी प्राप्त करते थे। लेकिन कुएं का उपयोग हैण्डपंपों की आमद के बाद कम होता गया तो कुआ उपेक्षित हो गया। गांव के दबंगों ने इसे अपने लिए अवसर मानकर कुए को पूरकर जगह हथियाने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया। वे काफी हद तक कामयाब हो चुके हैं।
उन्होंने अपने मकान के टूटे मलबे से कुआ भर दिया है। कुए के पनघट की ईंटें उखाड़कर ले जा रहे हैं। सूखे की वजह से गांव वालों को भी कुए की कद्र समझ में आ गई है। जिसकी वजह से वे कुए के अस्तित्व को मिटते देख उसे बचाने के लिए संघर्ष करने को भी तैयार हैं। प्रशासन को प्रार्थनापत्र देकर उन्होंने इसकी पहल कर डाली है। कौशल किशोर ने कहा कि जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ अगर खुदा न खास्ता गांव में अग्निकांड हो जाये ऐसी सूरत में यह कुआ ही उनके लिए जीवनदाता साबित होगा। इसलिए कुए को बचाने की लड़ाई उन्होंने जीवन मरण का संघर्ष बना लिया है। प्रशासन ने अगर इसमें हीलाहवाली बरती तो खतरनाक स्थितियां बन सकती हैं। जिसके लिए अधिकारी खुद जिम्मेदार होंगे।

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