0 मूंग की खेती कर किसान भाई खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाये
उरई। जनपद में मैथा की खेती पर किसानों को पानी की किल्लत को देखते हुए आपसी सामंजस्य बनाकर प्रतिबंध लगाना चाहिए। उक्त बात जिलाधिकारी श्रीमती संदीप कौर ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में फसल वित्तमान निर्धारण बैठक में कही।
उन्होंने कहा कि इस समय जनपद में पानी की किल्लत पैदा हो रही है जिससे पेयजल की व्यवस्था भी अव्यवस्थित है। ऐसे में किसानों को सामूहिक रूप से निर्णय लेकर मैथा की खेती को प्रतिबंधित कर देना चाहिए जिससे पानी बचाया जा सके। बैठक में वर्ष 2016-17 हेतु रवि एवं खरीफ की फसलों के बोये जाने वाले जिन्सांे के फसल वित्तमान निर्धारण किये गये है। जिससे जिन फसलों पर जितनी लागत निराई, गुड़ाई, बोवाई, बखराई, खाद-बीज, पानी आदि पर आती है उसके अनुपात पर निर्धारिण किया गया है। यथा संभव सभी जिन्सों पर पिछले वर्ष से अधिक धनराशि निर्धारित की गई है किन्हीं-किन्हीं मामलांे में पिछले वर्ष के समान निर्धारण किया गया है। इसी निर्धारण के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट निर्धारित की जाती है जो किसान जिस फसल बोता है उसी के अनुसार उसे ऋण उपलब्ध होता है। ऋण लेते समय ही उसकी बीमा अंश कट जाता है और फसल को दैवीय आपदा से हुए नुकसान का बीमा क्लेम मिलता है। जनपद में बागवानी ,आम, अमरूद, नीबू, बेर के बगीचे लगाये जाने तथा मूंग की खेती करने पर बल दिया गया। मूंग की खेती से खेत की मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ती है तथा खेत में यह खाद का काम भी करती है। बैठक में कृषि निदेशक अनिल कुमार पाठक, जिला कृषि अधिकारी चैधरी अरूण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह, एलडीएल सिद्धार्थ पाल तथा प्रगतिशील किसान अशोक सिंह जादौन, लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी, बलराम लंबरदार, राजवीर सिंह जादौन सहित अन्य अधिकारी और किसान उपस्थित रहे।





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