0 नीली बत्ती का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई – डीएम
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। टोल बचाने के लिए मुख्यालय छोड़ते ही कई प्रशासनिक अधिकारी नीली बत्ती का सहारा लेते हैं जिससे उनकी धनराशि सुरक्षित बनी रहे। इतना ही नहीं वह अपने वाहनों में इस बत्ती को सुरक्षित रख लेते हैं और जैसे ही मुख्यालय छोड़ते हैं उसको ऊपर लगाकर पूरा रुतबा दिखाने का प्रयास करते हैं जिसमें अधिशाषी अभियंता से लेकर मुख्य विकास अधिकारी भी शामिल हैं जबकि इन्हें लगाने का कोई भी अधिकार नहीं है।
जिलाधिकारी संदीप कौर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि अगर कोई नीली बत्ती का अवैध रूप से उपयोग कर रहा है तो उसके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और इसकी छानबीन भी कराई जाएगी कि कौन-कौन से अधिकारी नीली बत्ती का प्रयोग कर सकते हैं अगर वह इसके दायरे में नहीं आते होंगे तो उन्हें नीली बत्ती हटवाने के निर्देश भी जारी किए जाएंगे। वहीं जनपद में नीली बत्ती का लगातार दुरुपयोग होता जा रहा है जिसका मुख्य कारण कि टोल पर जो इनसे टैक्स वसूला जाता है वह न लगे। इतना ही नहीं क्षेत्र में भी रुतबा बरकरार रहे जबकि यह बत्ती लगाने का प्रावधान जिले स्तर पर जनपद न्यायाधीश एवं उनके समकक्ष न्यायिक सेवा के अधिकारीगण, जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षक जो जिले के प्रभारी हों, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर जिला मजिस्ट्रेट, नगर मजिस्ट्रेट, उप जिला मजिस्ट्रेट, कार्यकारी मजिस्ट्रेट नीली बत्ती लगा सकते हैं। प्रभारी निरीक्षक, थानाध्यक्ष, क्षेत्राधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, प्रवर्तन संबंधी ड्यूटी पर तैनात परिवहन, आबकारी, व्यापार कर विभाग के अधिकारी तथा वन विभाग के संबंधित प्रवर्तन अधिकारी नीली बत्ती लगा सकते हैं परंतु अगर चेकिंग अभियान छेड़ा जाए तो नियम विरुद्ध कई अधिकारी इस नीली बत्ती का दुरुपयोग करके कानून का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। कानून सबके लिए बराबर है सिर्फ अपना वीआईपीपन बरकरार करने के लिए यह नीली बत्ती लगाकर आम जनता पर रुआब गांठने का काम करते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भी जब ऐसे अधिकारी जाते हैं तो जनता भयभीत हो जाती है और वह सही बात को भी इन अधिकारियों के सामने नहीं रख पाती। इतना ही नहीं इनके वाहनों में पर्याप्त पुलिस बल से लेकर पूरा तामझाम रहता है जिसकी वजह से जो विकास की योजनाएं चलाई जा रही हैं और जिनका सत्यापन इन्हीं अधिकारियों को करना है वह सिर्फ खा-खा-खैया तक ही सीमित होकर रह जाती हैं। जनहित में ऐसे अधिकारी अगर कानून का खिलवाड़ करेंगे तो आम जनता से क्या अपेक्षा रखी जा सकती है।

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