नवरात्रि की आस्था, लौटते श्रद्धालु और सदूपुरा-कनासी के बीच पलटा ट्रैक्टर — सात घायल मेडिकल कॉलेज रेफर, सभी खतरे से बाहर
उरई । आस्था की यात्राएं अक्सर गीतों, जयकारों और उम्मीदों के सहारे चलती हैं। रास्ते में थकान होती है, धूल होती है, लेकिन मन में मंजिल का उजाला बना रहता है। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही था। ग्राम कैलिया खुर्द से हरदोई की ओर एक ट्रैक्टर पर सवार होकर श्रद्धालु जा रहे थे। नवरात्रि का व्रत पूरा हो चुका था। साथ में जवारे थे—पूजा, विश्वास और मनौती के प्रतीक। ट्रैक्टर पर करीब 15 से 20 पुरुष, महिलाएं और बच्चे सवार थे। किसी को क्या मालूम था कि सदूपुरा और कनासी के बीच सड़क का एक मोड़ उनकी यात्रा की कहानी बदल देगा।
अचानक ट्रैक्टर अनियंत्रित हुआ और सड़क किनारे पलट गया। एक पल पहले तक जो यात्रा आस्था के रास्ते पर आगे बढ़ रही थी, अगले ही पल वह चीखों, चोटों और अपनों को तलाशती निगाहों के बीच ठहर गई। जवारे लेकर निकले इन श्रद्धालुओं के सामने अब मंजिल नहीं, इलाज की जरूरत थी। रास्ते की धूल में आस्था के साथ जिंदगी भी घायल पड़ी थी।
जब रास्ता अस्पताल की ओर मुड़ गया
हादसे की खबर मिलते ही घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कोंच पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद सात घायलों को बेहतर चिकित्सा के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई रेफर कर दिया गया। बाकी घायलों का उपचार सीएचसी कोंच में शुरू किया गया।
दुर्घटना का दृश्य भले ही कुछ क्षणों में बीत गया हो, लेकिन उसके बाद शुरू हुई चिंता का समय लंबा था। किसी के सिर पर चोट थी, किसी के शरीर में दर्द और किसी के परिवार की आंखों में अपनों की सलामती को लेकर सवाल। आस्था की यात्रा अचानक चिकित्सा और देखभाल की परीक्षा बन गई थी।
अस्पताल पहुंचे जिलाधिकारी, घायलों से पूछा हाल
दुर्घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी समीर राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई पहुंचे। उन्होंने घायलों से स्वयं बातचीत की, उनका हाल जाना और चिकित्सकों से उपचार की स्थिति के बारे में जानकारी ली। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि किसी भी घायल के इलाज में लापरवाही न हो और सभी को जरूरत के मुताबिक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि घायलों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाए। प्रत्येक मरीज की स्थिति की नियमित निगरानी हो और जरूरत पड़ने पर तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए। मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी उन्हें भी समय-समय पर दी जाए, ताकि उपचार व्यवस्था में कोई कमी न रहने पाए।
सिर में चोट, कहीं फ्रैक्चर; सभी खतरे से बाहर
जिलाधिकारी के अनुसार, राजकीय मेडिकल कॉलेज में सीएमओ, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) तथा नेत्र रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञों की देखरेख में घायलों का उपचार किया जा रहा है। चिकित्सकों से मिली जानकारी के मुताबिक सभी घायल फिलहाल खतरे से बाहर हैं। कुछ श्रद्धालुओं के सिर में चोटें आई हैं, जबकि एक-दो घायलों में फ्रैक्चर की जानकारी मिली है। अन्य को मामूली चोटें आई हैं। राहत की बात यह है कि सभी घायल होश में हैं और बातचीत कर रहे हैं।
आस्था की राह पर जिंदगी का सवाल
यह दुर्घटना केवल एक ट्रैक्टर के पलटने की खबर नहीं है। यह उन अनगिनत यात्राओं की याद भी दिलाती है, जिनमें लोग अपनी श्रद्धा, परंपरा और मनौतियों को साथ लेकर निकलते हैं। उनके लिए रास्ता सिर्फ दूरी तय करने का माध्यम नहीं होता; वह विश्वास तक पहुंचने का जरिया भी होता है। लेकिन सड़क पर एक छोटी-सी चूक भी उस विश्वास से भरी यात्रा को संकट में बदल सकती है।
फिलहाल राहत इस बात की है कि चिकित्सकों के मुताबिक सभी घायल खतरे से बाहर हैं और जिला प्रशासन उनके उपचार की निगरानी कर रहा है। जवारे लेकर निकले इन श्रद्धालुओं की यात्रा भले ही बीच रास्ते में दुर्घटना का शिकार हो गई, लेकिन अब सबकी निगाहें इस उम्मीद पर टिकी हैं कि अस्पताल से लौटते समय उनके कदम फिर अपने घरों की ओर बढ़ें—इस बार बिना किसी भय और पीड़ा के।





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