0 चार माह में चुनाव कराने के हाईकोर्ट ने दिये निर्देश
कोंच-उरई। यहां के बहुचर्चित श्री धर्मादा रक्षिणी सभा के चुनावों को लेकर जारी उठापटक माननीय हाईकोर्ट के पुैसले के बाद थम गया है, अलबत्ता कोर्ट ने एक बार फिर से चुनाव पर पहरा बिठा दिया है। डीएम के आदेश के विरुद्घ हाईकोर्ट गई धर्मादा को कोर्ट ने इतनी राहत तो दे दी है कि डीएम का आदेश निरस्त कर दिया है लेकिन चुनाव कराने की जिम्मेदारी रजिस्ट्रार चिट फंड को दे दी है। अपने आदेश में उसने चार माह के भीतर चुनाव कराने के निर्देश दिये हैं।
गल्ला व्यापारियों की नगर की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था श्री धर्मादा रक्षिणी सभा के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव को लेकर पिछले कई महीनों से उठापटक का दौर जारी है। संस्था ने हालांकि अपना विस्तृत चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया था जिसके मुताबिक फरवरी 2016 के पहले पखवाड़े में निर्वाचन प्रस्तावित था। इसी बीच कोंच में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस में दर्जनों लोगों ने किसान सदस्य बनाये जाने में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुये चुनाव रोकने की मांग उठाई थी और इस मांग पर तत्कालीन डीएम रामगणेश ने एसडीएम की जांच आख्या के आधार पर चुनाव स्थगित करने का आदेश जारी कर दिया था। हालांकि बाद में डीएम ने चुनाव पर लगी रोक हटा दी थी लेकिन तमाम पहरे बिठाते हुये उन्होंने चुनाव कराने के निर्देश दिये थे। उन्होंने एसडीएम कोंच और डीडीओ को सही सही मतदाता सूची बना कर चुनाव करने का आदेश कर दिया था, पर्यवेक्षण के लिये उन्होंने एडीएम को भी नियुक्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ धर्मादा कमेटी के मंत्री राकेश अग्रवाल हाईकोर्ट चले गये जहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद विद्वान न्यायाधीश ने डीएम का आदेश तो यह कहते हुये निरस्त कर दिया कि डीएम को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है, लेकिन कोर्ट ने भी चुनाव कराने के लिये रजिस्ट्रार चिट फंड को नामित कर दिया है। अपने आदेश में कोर्ट ने चार माह में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के निर्देश दिये हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि रजिस्ट्रार चिट फंड किस आधार पर चुनाव कराते हैं, धर्मादा द्वारा प्रस्तुत की गई 104 सदस्यीय किसान मतदाता सूची को मान्यता देकर या फिर नये सिरे से किसान मतदाता बना कर क्योंकि सारी लड़ाई इन्हीं किसान मतदाताओं को लेकर है?

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