27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ceउरई। गैंगस्टर अदालत ने 2009 में निरुद्ध किये गये चार आरोपियों को न केवल बरी कर दिया बल्कि तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल और एसपी सहित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का आदेश प्रदेश के मुख्य सचिव को भिजवा दिया।
वर्ष 2009 में आटा पुलिस ने चार लोगों शंभू दयाल उर्फ शंभूनाथ पुत्र मन्नू लाल निवासी लैकूपुर थाना आटा, संतोष केड़ा पुत्र दीनदयाल निवासी बिलगांव थाना जलालपुर जिला हमीरपुर, वीरेंद्र उर्फ वीरन पुत्र बल्दाऊ लोधी निवासी बम्हौरी थाना आटा और त्रिलोकी सिंह पुत्र लक्ष्मीप्रसाद लोधी निवासी खेड़ा शिलाजीत थाना जरिया जिला हमीरपुर के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। तत्कालीन डीएम और एसपी द्वारा इसे अनुमोदन दिये जाने के बाद चारों आरोपियों को इसका नोटिस तामील करके जेल में छह माह के लिए निरुद्ध कर दिया गया।
इस मामले का ट्रायल विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर मनोज शुक्ला की अदालत में हो रहा था। सुनवाई पूरी होने के बाद मनोज शुक्ला ने पाया कि इन पर की गई गैंगस्टर की कार्रवाई कहीं से साबित नही होती। उन्होंने तत्कालीन अधिकारियों को इसमें मनमानी और गलत तरीके से कार्रवाई करने का दोषी पाया। तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट रिग्जियान सैंफिल व एसपी को उन्होंने गैंगस्टर अनुमोदित करने में लापरवाही बरतने का दोषी करार दिया। इसी के साथ उन्होंने मुख्य सचिव के लिए रिग्जियान सैंफिल, उस समय के एसपी, आटा के तत्कालीन थानाध्यक्ष सरस चंद्र और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी पहूप सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का आदेश मुख्य सचिव के लिए लिख दिया। इस आदेश की प्रति जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय को भिजवाने और एसपी को इस वास्ते देने कि वे मुख्य सचिव तक आदेश प्रेषित कराने की जिम्मेदारी निभायें का आर्डर भी उन्होंने लिखवा दिया। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर के इस अभूतपूर्व आर्डर से प्रशासनिक और पुलिसिया हलके में खलबली मच गई है।
दोष मुक्त किये गये आरोपियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता शिवेश सिंह सेंगर ने बताया कि चारों आरोपी जमानत में हैं। अदालत के आदेश के मुताबिक उनसे 30-30 हजार रुपये के निजी बंध पत्र और इतनी ही राशि की दो-दो प्रतिभूति दाखिल कराई जा रही है। तांकि उनकी जमानत रिहाई में तब्दील की जा सके। उधर पुलिस सूत्रों ने बताया है कि अदालती कार्रवाई के निशाने में आये अधिकारियों में से पहूप सिंह दिवंगत हो चुके हैं।

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