05orai01 05orai02 05orai03उरई। नव निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन का शपथ ग्रहण समारोह जिला पंचायत परिसर में धूमधाम से आयोजित किया गया। इसमें समाजवादी पार्टी की प्रमुख जिला पंचायत सदस्यों ने भी भाग लिया लेकिन किंग मेकर कहे जा रहे पार्टी के निष्कासित नेता कार्यक्रम से दूर रहे। समाजवादी पार्टी के एक और निष्कासित नेता सुदामा दीक्षित व उनकी जिला पंचायत सदस्य पत्नी नम्रता को भी लोगों की आंखें तलाशती रहीं, लेकिन वे भी कार्यक्रम में नही फटके। शपथ ग्रहण समारोह में सबसे ज्यादा उत्साहित भाजपा के नेता रहे। एक तरह से शपथ ग्रहण समारोह का मंच उन्ही के कब्जे में रहा।
जिलाधिकारी के बाहर होने के कारण अपर जिलाधिकारी आनंद कुमार ने सुमन निरंजन को शपथ दिलाई। शपथ का मजमून काफी विलक्षण था। जिसका जिला पंचायत से कोई संबंध नजर नही आया। देश की संप्रभुता की रक्षा और भारतीय संविधान में अक्षुण्ण निष्ठा की शपथ लेकर उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के शपथ ग्रहण को केंद्रीय मंत्री के शपथ ग्रहण के दर्जें में बदल दिया। वैसे तो कार्यक्रम में बबीना उपचुनाव में निर्वाचित सदस्य और अध्यक्ष पद की पराजित प्रत्याशी आसना खातून को भी शपथ दिलाई जानी थी। लेकिन उन्होंने और उनके लोगों ने कार्यक्रम का अघोषित बहिष्कार किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्या इच्छाराजे और संध्या मौखरी की मंच पर उपस्थिति को लोगों ने सबसे ज्यादा नोटिस किया। संचालन शिक्षक नेता युद्धवीर कंथरिया कर रहे थे। लेकिन सूत्रधार की भूमिका में भाजपा के तेज तर्रार युवा सदस्य पुष्पेंद्र सेंगर थे। मंच पर उपस्थित विशिष्टजनों में भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा, भाजपा के पूर्व विधायक संतराम सेंगर और बसपा विधायक संतराम कुशवाहा भी थे। सपा के ज्यादातर प्रमुख नेता कार्यक्रम में नही आये। उन सब की ओर से पूर्व विधायक केशव सिंह सेंगर ने मंच पर प्रतिनिधित्व किया।
भले ही यह कहा जा रहा हो कि जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव की हारजीत सपा बनाम सपा के बीच ही रही है लेकिन भाजपाई जिस तरह से शपथ ग्रहण समारोह में जोश में थे उसे कुछ लोग बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना जरूर मान रहे थे लेकिन भाजपा यह जताने में शपथ ग्रहण समारोह के बहाने कामयाब रही कि सुमन निरंजन की जीत का तीर उसी ने मारा है और इस नाते जिले की राजनीति में उसकी धाक सबसे ऊपर हो गई है।

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