cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। समाजवादी पार्टी में निष्कासित नेताओं की वापसी के लिए हाईकमान के सामने जोर आजमाइश का सिलसिला बराबर जारी है। लेकिन अभी तक हाईकमान के पसीजने का कोई संकेत नही मिला है। इसके बावजूद आज एक पक्ष के सूत्रों ने दावा किया कि शुरू में निष्कासित किये गये चार नेताओं की घर वापसी पर प्रदेश सपाध्यक्ष अखिलेश यादव एक-दो दिन में ही मुहर लगा सकते हैं।
बुधवार को पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी और उनके समर्थक निष्कासन रदद करने की गुहार करने लखनऊ गये थे। अनुरागी के साथ खासतौर से अल्पसंख्यक वर्ग का भारी हुजूम था। उम्मीद यह थी कि अनुरागी के पक्ष में जनाधार का यह प्रदर्शन देखकर अखिलेश अपना फैसला बदलने को तैयार हो जायेंगे लेकिन अभी तक इस बारे में कोई फैसला सामने नही आया है। अनुरागी विरोधियों का तो कहना यह है कि मुख्यमंत्री के यहां पहुंचने के पहले सैफई में जाकर शिवपाल सिंह से मुलाकात करना अनुरागी को भारी पड़ गया। जिसकी वजह से अखिलेश ने मुलाकात के समय उन्हें झिड़क दिया। इसमें अतिश्योक्ति हो सकती है लेकिन अनुरागी को बुरा-भला कहने वाली मांडवी निरंजन को महिला मोर्चें का अध्यक्ष पद इनाम के बतौर लौटाये जाने से यह जाहिर हुआ है कि अनुरागी की मुश्किलें फिलहाल खत्म होने की बजाय बढ़ रहीं हैं।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री के सामने आश्वासन देने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मुकर जाने के कारण निष्कासित नेताओं पर अब अखिलेश की मेहरबान हो जाने की चर्चाएं आज सोशल मीडिया पर वायरल होती रहीं। बताया जाता है कि चारों निष्कासित नेताओं को मुख्यमंत्री के यहां से लखनऊ आकर मुलाकात करने का बुलावा आया था। मुलाकात के समय प्रदेश के एक पूर्व कैबिनेट मंत्री जिनके बारे में समझा जाता है कि वे मनोज पाण्डेय हो सकते हैं और मुख्यमंत्री के नजदीकी एक रिश्तेदार शायद पुष्पेंद्र ममना निष्कासित नेताओं के साथ थे। अखिलेश ने कहते है कि चारों नेताओं का निष्कासन रदद करने की हामी उनके सामने भर दी है।
उधर गरमा-गरम अटकलबाजियों के बीच अनुरागी और उनके समर्थकों को बाईपास करते हुए मुसलमानों के घाव पर मरहम लगाने के लिए सपा जिलाध्यक्ष के पद पर एक बार फिर बदलाव करते हुए किसी मुसलिम नेता को जिले में संगठन की कमान सौंपे जाने की चर्चाओं का बाजार भी आज गर्म रहा।

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