उरई। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के उरई में रोड-शो की तारीख तय हो गयी है। विधानसभा चुनाव के अभियान की बाकायदा शुरूआत के पहले कांग्रेस के बम्पर धमाके के रूप में होने जा रहे राहुल के रोड-शो को लेकर पार्टी की जिला इकाई पूरे जोरशोर से तैयारियों में जुट पड़ी है।
कांग्रेस के चुनाव अभियान के व्यूह रचनाकार प्रशांत किशोर ने प्रदेश में मुर्दा पड़ी कांग्रेस पार्टी को फिर से पूरी जिंदादिली के साथ खड़े करने के लिए जो फार्मूले तय किये हैं उनके तहत पार्टी के युवराज राहुल गांधी को जिलों-जिलों में सड़क पर उतरने का कार्यक्रम बनाया गया है। राहुल गांधी के उरई में रोड-शो के कार्यक्रम की खबर हमने सबसे पहले कुछ दिनों पूर्व उस समय दे दी थी जब टीम पीके के सदस्यों ने जालौन रोड स्थित होटल श्रीहरि में डेरा जमाकर इसका खाका तैयार किया था।
राहुल गांधी का वैसे पूरे बुंदेलखंड में रोड-शो का कार्यक्रम तय किया गया है। जिसकी शुरूआत धर्मनगरी चित्रकूट में भगवान के दर्शनों के साथ होगी। उरई में राहुल गांधी का रोड-शो 19 सितंबर को कराया जायेगा। वे स्टेट बैंक से अपना रोड-शो शुरू कर मुसलिम बाहुल्य बजरिया से होकर गुजरेंगे। इसके बाद माहिल तालाब से घंटाघर और भगत सिंह चैराहा होते हुए उनका रोड-शो वापस स्टेट बैंक की मैन ब्रांच के सामने ही समाप्त होगा। सुबह 11 बजे से दोपहर ढ़ाई बजे तक का समय रोड-शो के लिए तय किया गया है।
गौरतलब है कि जालौन जिला एक समय कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है। राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 1984 के चुनाव में जिले की लोकसभा सीट और उस समय के मुताबिक चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को रिकार्ड अंतर से कामयाबी मिली थी। 1984 के चुनाव अभियान में राजीव गांधी ने इंदिरा स्टेडियम में जनसभा को संबोधित किया था। जिसे जिले की अभी तक की सबसे बड़ी सभा माना जाता है। लेकिन 1989 से कांग्रेस का यहां दिया बुझना शुरू हुआ और कई चुनाव में सूपड़ा साफ के बाद 2007 में उरई विधानसभा सीट जीतकर विनोद चतुर्वेदी ने जनपद में कांग्रेस के पुनर्जीवन की नीव रखी। 2012 के चुनाव में विनोद चतुर्वेदी तो माधौगढ़ से उम्मीदवार बनकर विधानसभा में अपनी सीट गंवा बैठे लेकिन आश्चर्य जनक रूप से उनके विकल्प में जिले में कांग्रेस को कालपी की सीट मिल गई।
इस आधार पर टीम पीके ने यह कयास कांग्रेस आला कमान के सामने जाहिर किया है कि जालौन जिले में कांग्रेस पार्टी फीनिक्स पक्षी की मानिंद है जो अपनी राख से फिर जिंदा होने की कुब्बत रखता है। इसलिए कांग्रेस का फिलहाल जिले में कोई वजूद भले ही नजर न आता हो लेकिन ऐन चुनाव के समय पार्टी यहां अपना होमवर्क प्रभावी ढंग से कर ले तो इस जनपद में वह करिश्मा भी कर सकती है। कांग्रेस का यह विश्वास चुनावी नतीजों की कसौटी पर कितना खरा साबित होगा यह तो अभी नही कहा जा सकता लेकिन राहुल गांधी का फिलहाल कांग्रेस के लिए रेगिस्तान समझे जा रहे इस जिले में रोड-शो के जरिये नाव खेने का जीवटतापूर्ण प्रयास लोगों में उत्सुकता का विषय जरूर बनेगा।






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