12 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज, आपातकालीन सेवाएं छोड़ बाकी कार्यों के बहिष्कार की चेतावनी

जालौन। राज्य कर्मचारी का दर्जा, 21 हजार रुपये मासिक मानदेय और परिवार को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जैसी मांगों को लेकर आशा कार्यकत्रियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। 12 सूत्रीय मांगों के समर्थन में कार्य बहिष्कार का ऐलान करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

आशा कार्यकत्रियां लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रही हैं। उनकी प्रमुख मांगों में राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, प्रतिमाह 21 हजार रुपये मानदेय निर्धारित करने और उनके परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के साथ अन्य लंबित मांगों को पूरा करना शामिल है।

आशा एवं संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति की प्रदेश अध्यक्ष ऊषा पटेल ने कहा कि मांगें पूरी होने तक प्रदेशभर में कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं चालू रखी जाएंगी, जबकि अन्य कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा।

अपनी मांगों को लेकर कार्यकत्रियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) प्रमोद कुमार को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने सरकार से समस्याओं का जल्द समाधान कर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

कार्यकत्रियों का कहना है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रही हैं। अब उनकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। उन्होंने दोहराया कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

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