उरई। सूखी सर्दी के कारण जहां लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं किसानों को इससे कोई फायदा होता नजर नही आ रहा। जिससे उनकी निराशा और ज्यादा गहराने लगी है।
इस बार सर्दी का आलम भी निराला है। दिन में तेज धूप रहती है लेकिन सुबह-शाम गलन भरी सर्दी से जवान तक थर्रा उठते हैं और उम्र दराज लोगों को तो एक रात बाहर काटना जिंदगी की एक अल्प से गुजर जाने के बराबर लगता है। पहले के वर्षों में सर्दी के साथ ओस भी पड़ती थी। लेकिन इस बार जनवरी का दूसरा सप्ताह शुरू होने को है और सर्दी के साथ ओस का दूर-दूर तक पता नही है। इस कारण आमतौर पर सर्दी में फसलों को जो टाॅनिक मिलता था वह नही मिल रहा। दिन की गर्मी की वजह से वैसे भी ज्यादा सिचाई की जरूरत फसलों में महसूस हो रही है। उस पर तुर्रा यह है कि नहर से लेकर नलकूप तक सभी किसानों के साथ दगा देने पर आमादा हैं।
शासन के रुख की वजह से अधिकारी किसानों के साथ हमदर्दी का राग अलापते नही थक रहे। लेकिन सब कुछ केवल जबानी जमा खर्च तक सीमित है। प्रशासन में इच्छा शक्ति के अभाव की वजह से ही यात्रिंक और विद्युत दोष से खराब पड़े राजकीय नलकूप संचालित नही हो पा रहे हैं। किसान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सनमान सिंह सेंगर का कहना है कि इस बार का भीषण सूखा भी अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तरह किसानों के लिए भले ही मुसीबत का कारण हो लेकिन अधिकारियों के लिए दोहन पर्व है। बिजली, पानी की व्यवस्थायें सुधारने के लिए आ रहे बजट का सदुपयोग करने की बजाय अधिकारी कागजी बिल बनाकर इसको हड़पने में मशगूल हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपने स्तर से इस मामले में निगरानी करने को कहा। ताकि उनकी सदिच्छा का लाभ उनकी पार्टी को मिल सके।






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