उरई। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई उस दिन केवल शिकायतों का मंच नहीं रही, बल्कि पीड़ा, उम्मीद और विश्वास की जीवंत तस्वीर बन गई। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ आमजन की समस्याएं सुनीं और यह संदेश दिया कि शासन केवल आदेश नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।
जनपद के दूर-दराज क्षेत्रों से आए नागरिकों की व्यथा को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित व ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनसमस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी समाधान ही सुशासन की असली पहचान है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या टालमटोल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस जनसुनवाई में कुल 30 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 22 का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। वर्षों से भटक रहे फरियादियों के चेहरों पर जब समाधान की रोशनी उतरी, तो आंखों में संतोष और मन में विश्वास साफ झलकने लगा।
विधवा की पीड़ा बनी प्रशासन की जिम्मेदारी
ग्राम हरचंदपुर निवासी मंजू देवी, पत्नी स्वर्गीय राजू, ने नम आंखों से बताया कि पति के निधन के बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। जिलाधिकारी ने उनकी पीड़ा को समझते हुए तत्काल प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत बच्चों को लाभ दिलाने और राशन कार्ड बनवाने के भी आदेश दिए गए। यह निर्णय मंजू देवी के लिए किसी संबल से कम नहीं था।
90 वर्षीय बुजुर्ग को मिला जीवन का सहारा
जनसुनवाई में पहुंचे 90 वर्षीय रामनारायण, निवासी सतोह, तहसील कौंच, अपनी कमजोर सुनने और देखने की समस्या लेकर आए थे। उनकी कांपती आवाज और लाचारी ने सभी को भावुक कर दिया। जिलाधिकारी ने तुरंत मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि उन्हें उसी दिन श्रवण यंत्र और चश्मा उपलब्ध कराया जाए।
प्रशासन की तत्परता का परिणाम यह रहा कि उसी दिन बुजुर्ग को कान की मशीन, चश्मा और आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया। वर्षों बाद उनके चेहरे पर लौटी मुस्कान, सुशासन की सबसे सुंदर तस्वीर बन गई।
शिकायत नहीं, समाधान की परंपरा
जनसुनवाई के दौरान राजस्व, पुलिस, विद्युत, चकरोड, घरेलू विवाद सहित अनेक प्रकार की शिकायतें सामने आईं। जिलाधिकारी ने हर प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्ता और संवेदनशीलता के साथ समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए।
यह जनसुनवाई साबित कर गई कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो फरियाद बोझ नहीं बनती, बल्कि भरोसे की डोर बन जाती है—जो जनता और शासन को मजबूती से जोड़ती है।








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