उरई। कुसमिलिया स्थित मिनी सहकारी बैंक से एक गरीब किसान की एफडी के पचास हजार रुपये मय ब्याज के निकाल लिए गये। जब किसान को पता चला तो उसके होश-फाख्ते हो गये। उसने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर समिति के स्टाॅफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सहकारिता आंदोलन को सबसे ज्यादा चूना कर्मचारियों द्वारा अमानत में खयानत करने की वजह से लगा है। जिसका सिलसिला इस पर अंकुश की तमाम ढपोरशंखी घोषणाओं के बावजूद आज तक बदस्तूर जारी है। इसमें कुसमिलिया मिनी बैंक ने हाल में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मिनी बैंक के सचिव मेहरबान सिंह पर कई सदस्यों का पैसा हेराफेरी एवं फर्जी बाउचर से निकाले जाने का आरोप है। जिसके मुकदमे भी डकोर कोतवाली में दर्ज हो चुके हैं।
मेहरबान सिंह की इस शोहरत की जानकारी होने पर 10 जून 2010 को उनकी भी पचास हजार रुपये एफडी बनाने के कारण उसके प्रति कृष्ण बिहारी सतर्क हो गये और उन्होंने मेहरबान सिंह के बारे में मालूमात की तो पता चला कि उनका भी पैसा 26 जून 2010 को ही निकाला जा चुका है। अपने साथ हुए इस विश्वासघात से कृष्णबिहारी के पैरों तले की जमीन खिसक गई। डीएम ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिये हैं।






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