cropped-12065564_1515048802143994_20145587447710710_n.jpgउरई। रामनगर स्थित आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य और अध्यापकों के वेतन रोके जाने से उनका असंतोष भड़क कर सतह पर आ गया है। प्रधानाचार्य जगप्रसाद चतुर्वेदी ने महाविद्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित कर कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र बाबू इस मामले में हठ धर्मिता का परिचय देकर उच्च न्यायालय के फैसले की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिससे उन्हें अवमानना की कार्रवाई का सामना करने की नौबत आ सकती है।
जगप्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में 27 मई 2004 के शासनादेश के तहत प्रधानाचार्य और अध्यापकों का वेतन निर्धारित किया गया था। लेकिन बाद में वित्त नियंत्रक कार्यालय, शिक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश इलाहाबाद की आॅडिट रिपोर्ट के आधार पर 29 दिसंबर 2009 को तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस वेतनमान को घटाने का आदेश जारी कर दिया। इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायिर हुई तो न केवल जिला विद्यालय निरीक्षक का आदेश स्थगित कर दिया गया बल्कि शासनादेश के मुताबिक उनके उच्चीकृत वेतन का भुगतान नियमित तौर पर जारी रखने का आदेश पारित कर दिया गया।
उच्च न्यायालय ने उक्त याचिका का न तो आज तक निस्तारण किया है और न ही कोई ऐसा आदेश पारित किया है जिससे उसका स्टे निष्प्रभावी होता। फिर भी जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र बाबू ने मनमाने ढंग से उन्हें घटाये गये वेतनमान को स्वीकार करने अन्यथा भुगतान अवरुद्ध रखने का फरमान सुना दिया। जिला विद्यालय निरीक्षक का यह निर्णय पूरी तरह से उच्च न्यायालय के स्थगनादेश के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि हम लोग जिला विद्यालय निरीक्षक से उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने की अपील कर रहे हैं तांकि वे न्यायालय की अवमानना जैसी कार्रवाई से अपने को निरापद रख सकें।

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