उरई। लगातार चली आ रही प्राकृतिक आपदा और इस फसल वर्ष के भीषण सूखे ने खेती की सारी रौनक निचोड़ ली है। गांवों में भुखमरी और पलायन की काली छाया मंडरा रही है। शासन ने भयानक स्थिति को देखते हुए सभी गांवों में मनरेगा के तहत मजदूरी के कार्यों को लगातार जारी रखने के निर्देश दिये हैं। नव निर्वाचित ग्राम प्रधानों को इसकी हिदायत करने के लिए तुलसी धाम में उनका सम्मेलन आयोजित कर जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों ने उन्हें संबोधित किया।
जिलाधिकारी रामगणेश ने कहा कि इस वर्ष का सूखा भीषण मानवीय आपदा का रूप ले चुका है। जिसकी वजह से सभी स्तरों पर प्रशासनिक इकाईयों को संवेदनशीलता का परिचय देने की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि नव निर्वाचित प्रधान अगर ठान लें तो पलायन और भुखमरी पर अंकुश रह सकता है। उन्होंने प्रधानों से कहा कि वे वर्तमान लेबर बजट की सीमा में कार्य योजना बनाकर तत्काल उस पर अमल शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि मनरेगा में एक जाॅब कार्ड पर डेढ़ सौ दिन काम कराने का प्रावधान कर दिया गया है। उन्होंने शासन की मंशा को देखते हुए प्रत्येक जाॅब कार्ड धारक का आधार कार्ड अपलोड कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने काम के अलावा मजदूरों के बकाया भुगतान को अविलंब उन्हें अदा कराने के लिए भी प्रधानों को सचेत किया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2016-17 के लेबर बजट की तैयारियों में जुट जाने के लिए कहा।
परियोजना निदेशक चित्रसेन ने महिलाओं को कुल काम में कम से कम तैतीस प्रतिशत हिस्सेदारी का ख्याल रखने और उनके लिए शिथिलनीय मानक के अनुरूप कार्य उनसे कराने का आग्रह प्रधानों से किया। मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने प्रधानों से कहा कि अगर उनके द्वारा मनरेगा का काम जानबूझ कर शुरू न कराने की शिकायत मिली तो उन पर कठोर कार्रवाई की जायेगी।
जिला पंचायत राज अधिकारी सरफराज आलम ने प्रधानों को उनके दायित्वों व कार्य प्रणाली से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की बैठक महीने में एक बार कराने और रबी व खरीफ फसलों की कटाई के बाद छमाही महत्वपूर्ण बैठकें कराने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि छह उप समितियां सदस्यों के अनुभव के आधार पर उन्हें समायोजित करते हुए बनाने के लिए कहा। ग्राम निधि के उपभोग के आॅडिट की प्रक्रिया के बारे में बताया। इस अवसर पर सभी नौ विकास खंडों के खंड विकास अधिकारी और प्रधान उपस्थित रहे।






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