0 वैंटीलेटर पर है कोंच का राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय
0 बिना एप्लीकेशन के हफ्तों से गायब है समूचा स्टाफ
0 एसडीएम के निरीक्षण में मिली हैं ये भारी खामियां
कोंच-उरई। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आये दिन अपनी नई नई योजनायें देने का ढिंढोरा पीटती नहीं अघाती है लेकिन दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं की हालत यह है कि अस्पतालों में न दवायें हाजिर हैं और न ही स्टाफ। कोंच का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल इसकी जीती जागती मिसाल है। आज एसडीएम संजयकुमार सिंह औचक निरीक्षण पर अस्पताल पहुंचे तो वहां के हालात किसी बूचड़खाने जैसे लगे। लगभग सारा स्टाफ बिना किसी पूर्व सूचना के हफ्तों से गायब मिला, भवन की हालत इतनी जर्जर है कि कभी भी कोई हादसा हो जाये, वार्डों में गंदे फटे और बदबू से भरे गद्दे पड़े हैं जिन पर शायद कुत्ता भी लेटने से मना कर दे। चैंका देने वाली बात यह सामने आई कि डॉक्टर सरकारी दवायें भी तभी देते हैं जब मरीज से उसके एवज में रकम वसूल ली जाती है।
लगभग रोज ही किसी न किसी विभाग का निरीक्षण करने निकल रहे कोंच एसडीएम ने आज पालिका कार्यालय के सामने पुराने अस्पताल भवन में चल रहे राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का रूख कर दिया तो वहां के हालात देख कर अधिकारी सन्न रह गये। अस्पताल का भवन इतना जर्जर कि कभी भी ऊपर की छत नीचे आ जाये और बड़े हादसे का वायस बन जाये। वार्डों की हालत उससे भी खराब, वहां बैड्स पर पड़े गद्दों के बारे में उन्होंने बताया कि गंदे, फटे और बदबूदार गद्दे वहां पड़े हैं और चारों तरफ गंदगी के अंबार लगे मिले। वहां आज सात मरीजों का पंजीकरण होना पाया गया, मौजूद मरीजों ने एसडीएम को बताया कि चिकित्सालय अधीक्षिका डॉ. शैलजा पटैरया सरकारी दवायें भी पैसे लेकर देती हैं अन्यथा की स्थिति में बाजार की दवायें लिख कर मरीज को वहां से भगा देती हैं। उक्त डॉक्टर बिना किसी सूचना के गैरहाजिर मिलीं। इसके अलावा स्टाफ नर्स कु. वंदना कुशवाहा भी बिना छुट्टी लिये 21 फरवरी से नदारत हैं तो स्वीपर शांतिदेवी 20 फरवरी से गैरहाजिर पाई गईं। अस्पताल में दवाओं का टोटा मिला। सारी रिपोर्ट बना कर एसडीएम ने जिलाधिकारी को भेज दी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल की हालत बहुत ही दयनीय है और वहां तैनात स्टाफ मटरगश्ती पर उतारू है, सरकारी योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है।






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