0 ग्यारह दशक बाद सुनी गई इस लाइन के सेवा विस्तार की मांग
कोंच-उरई। और आखिर शताब्दी भर बाद मौजूदा मोदी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु की कृपा जालौन खासतौर पर कोंच पर पर बरस ही गई। कोंच को भिंड से जोड़ते हुये नई रेल लाइन बनाने को मंजूरी देकर उन्होंने इलाकाई बाशिंदों को खुश कर दिया और उनमें अश्छे दिन आने की उम्मीद जागी है। इस उपलब्धि के लिये जहां मौजूदा जालौन-गरौठा-भोगनीपुर सांसद भानुप्रताप वर्मा को श्रेय दिया जाना चाहिये वहीं निवर्तमान सांसद घनश्याम अनुरागी के उस प्रयास को भी कमतर नहीं आंका जा सकता जिसमें उन्होंने इस लाइन का सर्वे स्वीकृत करा कर इसे आगे बढने का रास्ता दिखाया। इसके अलावा भिंड सांसद डॉ. भागीरथ प्रसाद भी इस लाइन को बनवाने की मुहिम में लगे थे और इस पई रेल परियोजना को स्वीकृत कराने में उनका भी अहम् योगदान भुलाया नहीं जा सकता, लिहाजा इन सभी के समवेत् प्रयासों का ही प्रतिफल है कि अब कोंच से आगे भी रेल लाइन जाने का रास्ता साफ हुआ है।
कोंच-भिंड रेल मार्ग व महोबा-उरई रेल मार्ग के लिए सर्वे तो कई बार हुए लेकिन रेल लाइन के निर्माण को हरी झंडी न मिल सकी थी, लेकिन रेल मंत्री ने दोनों रेल मार्गों के निर्माण को मंजूरी दे दी। कोंच-भिंड के 80 किलोमीटर रेल मार्ग के 1600 करोड़ व उरई-महोबा रेल मार्ग के लिए 1800 करोड़ रुपये को बजट में मंजूरी मिल गई। अभी तक इन मार्गों पर सिर्फ बस सेवा ही थी, लेकिन भविष्य में रेल मार्ग बनने की उम्मीद जगने से रेल सेवा का लाभ भी इन दोनों मार्गों पर यात्रियों को मिलेगा। इसके साथ ही रेल बजट में कानपुर-झांसी रेल मार्ग के मध्य 39 सबवे बनाए जाएंगे। मानव रहित क्रासिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए जनपद की 22 मानव रहित रेलवे क्रासिंग को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। इन सबसे इतर कोंच-भिंड रेल लाइन के बन जाने के बाद यहां के बीहड़ इलाकों में विकास की नई किरण उदय होने का आभास अभी से इलाकाई लोगों को होने लगा है।
कोंच-भिंड रेलवे की नई लाइन को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का ऐसा माहौल है जैसे दीपावली वक्त से पहले आ गई हो। लोग खुशियां मना रहे हैं और मिठाइयां बांट कर अपनी प्रसन्नता का इजहार कर रहे हैं। कोंच रेलवे स्टेशन पर पहुंचे उन लोगों जो बर्षों से इसी पल की प्रतीक्षा में थे, ने एक दूसरे का मुंह मीठा करा कर बधाईयों का आदान प्रदान किया है। हालांकि लोग इस तोहफे को लेकर अवाक् हैं, उन्हें यह कतई उम्मीद नहीं थी कि इस रेल बजट में यह सौगात मिल सकती है लेकिन जैसा कि यहां कहावत है कि जब ऊपर बाला देता है तो छपपर फाड़ कर देता है, ठीक इसी तर्ज नी यह नई रेल लाइन भी यहां के लोगों को मिल ही गई है। आज मानव शक्ति संस्था जिसने पिछले दिनों रेल के लिये पत्राचार कार्यक्रम चला कर हजारों पत्र रेल मंत्रालय को लिखवाये थे, के कार्यकर्ताओं ने कोंच स्टेशन पर पहुंच कर बधाईयों का आदान प्रदान किया और लोगों को मिली इस सौगात पर मिठाइयां खिलाईं।
मध्यप्रदेश के साथ व्यापारिक संबंध बनाने में मदद मिलेगी
गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय गोयल कहते हैं कि इस लाइन के खुलने से यहां के लोगों खासतौर पर व्यापार कार्य में लगे लोगों को मध्यप्रदेश से जुडने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा है कि इस नये मार्ग के खुलने से यहां के व्यापारियों को मध्यप्रदेश के साथ अपने व्यापारिक संबंध स्थापित करने में खासी मदद मिलेगी। इसके अलावा जीपीएस सिस्टम ट्रेनों में लगने से ट्रेन की सही लोकेशन मिलेगी जिससे यात्रियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होना पड़ेगा।
यहां के रूके विकास को गति मिलेगी
नगर के सर्वांगीण विकास की कमान अपने हाथों में थामने बाले पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया ने कोंच-भिंड रेल लाइन बनाने के लिये बजट में धन का प्रावधान किये जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुये क्षेत्रीय लोगों को बधाई दी है, साथ ही उन्होंने उन सांसदों जिन्होंने इस लाइन को स्वीकृत कराने में अपना बिषेष और भगीरथ योगदान दिया है, को साधुवाद देते हुये कहा है कि कोंच में रेल के रूकने से यहां का जो विकास अवरूद्ध था, उसे गति मिलेगी।
दयाशंकर के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता
कोंच रेल सेवा विस्तार की बात हो और उरई सदर विधायक दयाशंकर वर्मा को याद न किया जाये, यह तो अेमानी होगी। वर्ष 1995-96 में जब केन्द्र में देवगौड़ा सरकार थी और रामविलास पासवान रेल मंत्री थे तब कोंच-एट शटल बंद कर रेल बस चलाने की योजना बनी थी और तकरीबन डेढ माह तक शटल बंद रही थी, लेकिन यहां की तत्कालीन कोंच-एट शटल बचाओ संघर्ष समिति ने न सिर्फ आंदोलन छेड़ा बल्कि दिल्ली तक लड़ाई लड़ी जिसमें बतौर अगुआकार रहे दयाशंकर वर्मा जो पहले कोंच से विधायक चुने गये थे, ने ऐड़ी चोटी का जोर लगा कर शटल को पुनः बहाल कराया था। अगर शटल बंद हो गई होती तो अब तक कोंच की रेल सुविधा भी बंद हो गई होती और जब ट्रेन ही नहीं चलती तो रेल लाइन का विस्तार कहां से होता। उस वक्त शटल बचाओ संघर्ष समिति में शामिल लोगों पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. अशोक शुक्ला, पत्रकार स्व. राजीव तलवाड़, स्व. सुरेन्द्रसिंह निरंजन, पत्रकार रमेश तिवारी, स्व. सत्यनारायण शुक्ला, पत्रकार पुरूषोत्तमदास रिछारिया, पत्रकार ब्रजेन्द्र मयंक, पत्रकार मोहम्मद अफजाल खान, पत्रकार संतोष गोयल, केशरीमल तरसौलिया, अनिल वैद, डॉ. एलआर श्रीवास्तव, अखिलेश बबेले सहित उन तमाम लोगों के भगीरथ प्रयासों को लोग आज भी याद करते हैं।





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