cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngकोंच-उरई। आज यहां साइकिल यात्रा को लेकर बुलाई गई सपा की बैठक उस वक्त काफी असहज हो गई जब यकायक कार्यकर्ताओं का दर्द उभर कर सामने आया कि अधिकारी न तो उनकी सुनते हैं और न ही तबज्जो देते हैं। अचानक ही उछल कर निकले इस सवाल ने जिलाध्यक्ष और पार्टी प्रत्याशी को मजबूर कर दिया कि वे इन सवालों के जबाब देकर कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करें। उन्होंने किया भी ऐसा ही, जिलाध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिया कि अगर अधिकारी उनकी जायज बात को वजनदारी से नहीं लेते हैं तो संगठन के जिम्मेदार लोगों के संज्ञान में बात डाली जाये ताकि संबंधित अधिकारी से पहले तो काम करने की कही जा सके और अगर फिर भी वह न सुधरे तो उसके खिलाफ शासन को लिखा जा सके, लेकिन शर्त यह है कि काम जायज हो। लाखन सिंह कुशवाहा ने भी भरोसा दिया कि अधिकारियों को जनता और कार्यकर्ताओं के काम करने ही होंगे, अन्यथा की स्थिति में उन्हें यहां रहने नहीं दिया जायेगा। दरअसल, पार्टी के एक जिम्मेदार संगठनकर्ता अतरसिंह राठौर ने कह दिया कि अगर कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जायेगी या कार्यकर्ताओं को अधिकारी तबज्जो नहीं देंगे तो कार्यकर्ता हतोत्साहित होकर विपक्ष की भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ सकते हैं। देखा जाये तो राठौर की बात आम कार्यकर्ता की बड़ी ही सहज वेदना थी लेकिन उसके निहितार्थ बताते हैं कि उन्होंने वास्तव में बहुत ही गंभीर स्थिति की ओर इशारा किया है।

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