उरई। नन्ही बालिका की प्रतिभा बड़े-बड़े सयानों को भी अचरज में डालने वाली साबित हो रही है। रामपुरा थाने के सुदूर गांव टीहर के निवासी लोकेंद्र सिंह की पुत्री कीर्ति यूकेजी की छात्रा है जिसे होश संभालने में अभी कई वर्ष लगेंगे। लेकिन जन्मजात प्रतिभा की धनी यह बालिका नन्ही उम्र में ही ज्ञानियों के कान काटने लगी है। बालिका से देश की किसी भी राज्य की या दुनियां के किसी भी देश की राजधानी पूंछो तपाक से वह सटीक नाम बता देगी। भारत में कितने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री किस समय से किस समय तक पदासीन रहे यह ब्यौरा भी उसे कंठस्थ है। सामान्य ज्ञान के अलावा गणित में भी उसका जोड़ नही है। 90 तक की गिनती में किसी भी संख्या का घन और वर्ग पूछों सेकेण्ड नही लगते और वह एकदम सही गुणा बता देती है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सभी जिलों के नाम उसे मुंहजबानी याद हैं। किसी भी टेंस में हिंदी के वाक्यांश का अंग्रेजी में वह तपाक से अनुवाद कर देती है।
कीर्ति के पिता ने बताया कि उनके परिवार में पढ़ने लिखने में कोई व्यक्ति असाधारण नही रहा जिससे यह माना जा सके कि उसे आनुवांशिकी में यह प्रतिभा हासिल हुई है। खुद लोकेंद्र सिंह हाईस्कूल पास है तो उनकी पत्नी की शिक्षा सिर्फ पांचवीं तक हुई है। उन्होंने बताया कि दो साल की उम्र से ही कीर्ति ने विलक्षण स्मरण शक्ति का परिचय देना शुरू कर दिया था। लोकेंद्र आर्थिक रूप से बहुत सक्षम नही हैं। इसीलिए इतनी प्रतिभावान बालिका होते हुए भी गांव में ही कीर्ति को पढ़ाना उनकी मजबूरी है। कीर्ति की इच्छा बड़ी होकर आईएएस बनने की है और उसके आगाज को देखकर यह लगता है कि अगर उसे माहौल मिल जाये तो अपना यह सपना पूरा करना उसके लिए कोई मुश्किल काम नही है। जो लोग स्वर्ग में वातानुकूलित आवास आरक्षित कराने के लिए यज्ञ और कथाएं कराने में लाखों रुपये खर्च करके इस मुगालते में रहते हैं कि ऊपर वाला भी आदमी की तरह चमचागीरी पसंद है जिससे उनके इस आडंबर से वह उन्हें अपना कृपा पात्र बनाकर उनके ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं में कोई कमी नही छोड़ेगा। उनमें से कुछ लोगों को अगर सदबुद्धि आ जाये तो कीर्ति जैसी कई बालिकाएं गुदड़ी में छुपी हैं जिनके सपने पूरे होने से न केवल उनकी अपनी इच्छाएं पूरी होगीं बल्कि इस देश और समाज को भी दुनियां में सबसे अग्रणी बनने की अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा।






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