0 निर्माण मजदूर यूनियन ने दिखाये तेवर
0 मांग पत्र सौंप कार्रवाई के लिए दिया पांच दिन का समय
0 संज्ञान न लेने पर 25 मई को होगा हंगामी धरना प्रदर्शन
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। निर्माण मजदूर सर्वहारा वर्ग में अग्रणी है लेकिन न तो सरकार उस पर नजरें इनायत करने को तैयार है और न ही प्रशासन। मजदूरों ने अब खुद अपने हक की लड़ाई का परचम थाम लिया है। निर्माण मजदूर यूनियन के अध्यक्ष हरदास और मंत्री देवेंद्र सिंह आजाद ने विभिन्न मांगों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति से लेकर जिलाधिकारी तक को नोटिस भेजा है कि इन पर पांच दिन में कार्रवाई न होने की स्थिति में 25 मई को कलैक्ट्रेट में हंगामी धरना प्रदशित किया जायेगा। जिसमें अगर कोई अनहोनी होती है तो प्रशासन जिम्मेदार होगा।
मजदूरों को किताबों में भले ही श्रमरत्न जैसे अलंकरणों से फुलाया जाता हो लेकिन हकीकत में सभी जगह उनकी बेकद्री हो रही है। उरई क्लब में श्रम विभाग स्थापित है जिसमें दूर-दूर से आने वाले आगंतुक श्रमिकों के लिए कोई अलग कक्ष निर्धारित नही किया गया। न पेयजल की व्यवस्था है, न कोई अन्य जीवन रक्षा की कोई व्यवस्था अगर हारा थका मजदूर प्यास की वजह से लू खाकर श्रम कार्यालय में मर जाये तो अधिकारी और सरकार की बला से। देवेंद्र सिंह आजाद ने कहा कि श्रमिक अब अपने साथ इस गरिमाहीन बर्ताव को बर्दास्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हर महीने किसान दिवस आयोजित होता है वैसे ही श्रमिक दिवस आयोजित करने पर भी सरकार ध्यान दे। इसमें सभी जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में निर्माण मजदूर यूनियन के साथ वार्ता का क्रम बनाया जाये।
उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के कार्यालय पर जनहित गारंटी अधिनियम की नियमावली अंकित कराई जायें तांकि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की जबावदेही तय करने के लिए श्रमिकों में जागरूकता आ सके। श्रम कानूनों और कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए श्रम विभाग के तत्वावधान में जन सुनवाई के आयोजन की व्यवस्था तय की जाये। राठ रोड पर जहां श्रम बाजार लगता है मजदूरों के बैठने और पेयजल जैसी सुविधाओं के इंतजाम के कदम उठाये जायें। श्रमिकों के दुर्घटना ग्रस्त होने या गंभीर बीमारी की स्थिति में आवश्यक चिकित्सा व्यय आदि की प्रतिपूर्ति श्रम विभाग में आवेदन दाखिल होते ही किया जाना सुनिश्चित किया जाये। अपंजीकृत श्रमिकों से कार्य कराने वाले शोषक भवन मालिकों के विरुद्ध कार्य के दौरान श्रमिक की मृत्यु होने की स्थिति में आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई की व्यवस्था की जाये। गर्भधात्री महिला श्रमिकों को समय से आर्थिक लाभ प्राप्त हो तांकि उनके बच्चें कुपोषण बीमारी आदि का शिकार न हो सकें। बीपीएल श्रमिकों के इच्छुक बच्चों के प्राइवेट विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को अमल में लाया जायें। पंजीकृत श्रमिकों को समाजवादी पेंशन और विधवा पेंशन जैसी योजनाओं से लाभान्वित किया जाये। श्रमिक मजदूरों की भुगतान प्रक्रिया और मजदूरी न देने की शिकायतों के आवेदन के निस्तारण हेतु जनपद स्तर पर एक अधिकारी नामित किया जाये। उत्तर प्रदेश भवन सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित मिडड-डे मील और विद्यालय छात्रावास योजना का जनपद में शुभारंभ कराया जाये। सूखे को देखते हुए इसे प्राथमिकता दी जाये। निर्माण मजदूर यूनियन के कार्यालय हेतु नजूल भूमि आवंटित की जाये।
देवेंद्र सिंह आजाद ने कहा कि इस तरह की कई मांगों को लेकर जो नोटिस दिया गया है उस पर प्रशासन से पांच दिन के अंदर कार्रवाई करने की अपेक्षा है। अन्यथा 25 मई को धरना प्रदर्शन हमारी मजबूरी हो जायेगी।

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