उरई। इप्टा के तत्वावधान में गांधी इंटर काॅलेज में एक पखवारे से चल रही बाल रंगमंचीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन गुरूवार को सुबह हो गया। इस अवसर पर चिकित्सक डाॅ. रेनू चंद्रा व महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। जबकि अध्यक्षता डाॅ. रमेश चंद्रा और डाॅ. सतीश शर्मा ने की। इस दौरान राज पप्पन द्वारा लिखित एवं निर्देशित प्रकृति औरत और 1090 नाटक का बाल रंगकर्मियों ने बेहतरीन मंचन किया।
समापन कार्यक्रम की सभा को संबोधित करते हुए डाॅ. रेनू चंद्रा ने बच्चों को निर्भय होकर रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि अंदर जो डर का किला है उसे तोड़ने की जरूरत है तभी उत्पीड़न और अन्याय से मुकाबला किया जा सकता है। महिला थानाध्यक्ष नीलेश से बालिकाओं ने कई सवाल किये। जिनके उत्तर देकर उन्होंने बालिकाओं की चेतना को विकसित करने का सार्थक प्रयास किया। उन्होंने किशोरियों से कहा कि वे सर्वांगीण शिक्षा पर ध्यान देते हुए पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ नाट्य प्रतिभा जैसी सृजनात्मक अभिरुचियों को भी अपने में पुष्पित-पल्लवित करने में कसर न छोड़े। डाॅ. रमेश चंद्रा ने कहा कि रंगकर्म करते-करते हम कब बदल जाते हैं हमें पता नही चलता। उन्होंने कहा कि शिक्षा में खेलकूंद के साथ-साथ रंगकर्म को भी शामिल किया जाना चाहिए। डाॅ. सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि रंगकर्म से चेतना को उन्नत करने में काफी मदद मिलती है इसलिए स्कूल काॅलेजों में छात्र-छात्राओं के रुझान को इस ओर भी प्रेरित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम संयोजक और गांधी इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य डाॅ. रविशंकर अग्रवाल ने कहा कि आज मंचित नाटक के माध्यम् से प्रकृति का मनुष्य द्वारा किये जा रहे अंधाधुंध दोहन से उत्पन्न संकट के बारे में जागरूक करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में धनीराम, धर्मेंद्र, प्रदीप वर्मा आदि रंगकर्मी और महिला पुलिस कर्मी अनुराधा यादव, सुषमा, गांधी इंटर काॅलेज के प्राध्यापक शैलेश, जितेंद्र वर्मा, अमृत लाल नागर, महावीर, दीपक, सर्वेश कुमार, बाल रंगकर्मी निखिल, वरुण, विनय, अनिल, आमिर अली, सना खातून, ऋतु, राधा, तृप्ति, शिवानी, खुशबू पांचाल, विनीता राठौर, श्वेता अहिरवार, ज्योति, शिवानी, मोहिनी, कशिश, संजना वर्मा, शिखा आदि ने अभिनय किया। संचालन राज पप्पन ने किया।





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