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उरई। सूखा और भुखमरी से त्रस्त आवाम को राहत देने के लिए हो रहे ढोंग की पोल सोमवार को कलैक्ट्रेट में आयोजित बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच की जन पंचायत में खोल दी गई। भुक्तभोगी ग्रामीणों ने जन पंचायत में जो बयान दिये उनसे साफ था कि पानी, चारा और खाद्यान्न पैकेट के नाम पर सरकारी खजाना पीड़ित आवाम पर नहीं बल्कि दलालों और भ्रष्ट नौकरशाही के लिए लुटाया जा रहा है।
महेबा ब्लाॅक के दहेलखंड की वैदेही देवी हो या नरिहान की मायादेवी जन पंचायत में जो लोग भीषण गर्मी के बावजूद अपनी व्यथा सुनाने आये थे सबकी आपबीती एक जैसी थी। उनके नाम गांव के सामंतों ने दलित होने की वजह से अंत्योदय की सूची से कटवाकर खाद्यान्न पैकेट से उन्हें महरूम करा दिया। यह खाद्यान्न सूची में घुसपैठ करके उनके चहेते अच्छे खासे संपन्न होने के बावजूद उड़ा ले गये। प्रशासन में अंधे पीसें कुत्ते खायें का राज है। जिसके चलते आवाम की शिकायतों पर कोई अधिकारी गौर करने को तैयार नही है।
आश्चर्य की बात यह है कि जो लोग खुद सड़ी गली सामाजिक व्यवस्था के शिकार रहे हैं। अधिकार हासिल होने के बाद वे परंपरागत सामंतों से भी ज्यादा बड़े सामंत बन गये हैं। इसलिए सत्ताधारियों की यह नस्ल दलितों के साथ जातिगत आधार पर जुल्म के मामले में पहले वालों को कोसो पीछे छोड़ने पर आमादा है। दलितों के मोहल्लों के ठप्प हैंडपंप सुधरवाने में आनाकानी से यह साफ जाहिर हो रहा है जबकि वर्तमान दौर में इस तरह का व्यवहार निष्ठुरता की पराकाष्ठा ही कहा जायेगा। काम देने में भी दलितों को चीन्ह-चीन्ह कर छोड़ा जा रहा है। जन पंचायत का संचालन मंच के संयोजक और क्रांतिकारी युवा नेता कुलदीप कुमार बौद्ध ने किया।

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